"दलाल टैक्स" की वसूली अब बंद, ऐ "थानों के ठेकेदारों", तुम्हारी छुट्टी तय! बिहार पुलिस के शीर्ष नायक का कठोर संदेश - "दलालों को संरक्षण देने वाले थानाध्यक्षों पर प्रहार निश्चित"
बिहार के थानों में दलालों का रुतबा तो देखते ही बनता था - ये वो "शानदार शख्सियतें" थीं, जो बिना बुलाए मेहमान बनकर थानों में कुंडली मार बैठती थीं। मानो थाना इनका बाप-दादा की जायदाद हो! हर मुश्किल का "इलाज" इनके पास था - बस अपनी जेब खाली करो और इनके "करिश्मे" देखो. पढ़े पुरी खबर.....

पटना: बिहार के थानों में दलालों का रुतबा तो देखते ही बनता था - ये वो "शानदार शख्सियतें" थीं, जो बिना बुलाए मेहमान बनकर थानों में कुंडली मार बैठती थीं। मानो थाना इनका बाप-दादा की जायदाद हो! हर मुश्किल का "इलाज" इनके पास था - बस अपनी जेब खाली करो और इनके "करिश्मे" देखो। पीड़ितों की लाचारी को ये अपनी "रोटी" बनाते थे, और थानों को अपना "धंधा-खाना" समझ बैठे थे। मगर अब डीजीपी का ताजा हुक्मनामा इनके "सपनों के महल" पर बिजली बनकर गिरा है।
ADVERTISEMENT
ये दलाल तो ऐसे थे जैसे थाना इनका दूसरा घर हो। सुबह की चाय से लेकर रात की "डील" तक, ये कुर्सियों पर जमे रहते - न कोई ड्यूटी, न कोई जवाबदेही, बस "दलाली" का खेल। कोई बेचारा बोले, "साहब, FIR लिखवा दो," तो ये तपाक से कहते, "पहले हमारी 'फीस' दो, फिर साहब से बात होगी!" जनता की मजबूरी पर ठहाके लगाते हुए इन्होंने अपनी थैली भरी, और पुलिस की इज्जत को बाजार में नीलाम कर दिया। लेकिन अब इनके "अच्छे दिन" ढलान पर हैं।
ADVERTISEMENT
डीजीपी ने दो टूक कह दिया - "थाना जनता का मंदिर है, तुम्हारा अड्डा नहीं।" अब ये "दलाल बाबू" शायद सर पकड़कर बैठ गए होंगे, सोचते होंगे - "अरे, हमारा तो कारोबार ठप हो गया, अब कहां मुंह दिखाएं?" शायद इन्हें कोई नया "ठिकाना" तलाशना पड़े, क्योंकि थानों के दरवाजे अब इन "बिन बुलाए सूरमाओं" के लिए ताले लगाने को तैयार हैं। थानाध्यक्षों को भी खरी-खरी सुनाई गई है - "दलालों की 'पालकी' ढोना बंद करो, वरना अपनी कुर्सी को ठोकर मारो!"
ADVERTISEMENT
ऐ बिहार के दलालो, सुन लो यह ताना - अब वक्त है कि अपनी "दुकान" समेटो, क्योंकि जनता की आंखें और पुलिस का डंडा दोनों तुम पर टिके हैं। जनता के तीर सहो और रास्ता नापो, वरना डीजीपी का यह फरमान तुम्हारी "दलाली की दुकान" को हमेशा के लिए तहस-नहस कर देगा! "दलाल टैक्स" की वसूली अब बंद, ऐ "थानों के ठेकेदारों", तुम्हारी छुट्टी तय!