दरभंगा AIIMS-अमास एक्सप्रेसवे पर सियासी विस्फोट! पूर्व विधायक अमरनाथ गामी ने अपनी ही सरकार के फैसलों पर उठाए एक के बाद एक गंभीर सवाल, परियोजना को लेकर लगाए कई आरोप; जानिए प्रेस विज्ञप्ति में क्या-क्या कहा और किन बिंदुओं पर मांगी जांच....
बिहार की बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजनाओं में शामिल 'दरभंगा AIIMS-अमास एक्सप्रेसवे' को लेकर अब सियासी और प्रशासनिक हलकों में नए सवाल खड़े हो गए हैं। दरभंगा के पूर्व विधायक अमरनाथ गामी ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस परियोजना की वैधता, आवश्यकता, तकनीकी आधार, DPR, टेंडर प्रक्रिया और सरकारी निर्णयों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पढ़े पूरी खबर....
दरभंगा: बिहार की बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजनाओं में शामिल 'दरभंगा AIIMS-अमास एक्सप्रेसवे' को लेकर अब सियासी और प्रशासनिक हलकों में नए सवाल खड़े हो गए हैं। दरभंगा के पूर्व विधायक अमरनाथ गामी ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस परियोजना की वैधता, आवश्यकता, तकनीकी आधार, DPR, टेंडर प्रक्रिया और सरकारी निर्णयों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खास बात यह है कि गामी ने यह आरोप किसी विपक्षी दल के नेता के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे राजनीतिक चेहरे के रूप में लगाए हैं जो लंबे समय तक सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उनके आरोपों ने इस पूरे मामले को नई राजनीतिक और प्रशासनिक गंभीरता प्रदान कर दी है।

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पूर्व विधायक ने दावा किया है कि जिस परियोजना को आज 'दरभंगा AIIMS-अमास एक्सप्रेसवे' के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, वह वास्तव में नई सड़क परियोजना नहीं, बल्कि पूर्व में स्वीकृत DMCH-AIIMS फोरलेन एलिवेटेड संपर्क मार्ग का ही परिवर्तित स्वरूप है। उनका आरोप है कि केवल नाम बदलकर और परियोजना का विस्तार दिखाकर इसे नई योजना के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि मूल संरचना और फाइलों का आधार वही रखा गया।

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AIIMS की मूल अवधारणा और 2019-20 की स्वीकृति का हवाला: अमरनाथ गामी का कहना है कि वर्ष 2019-20 में प्रस्तावित DMCH-AIIMS को राष्ट्रीय राजमार्ग-57 तथा दरभंगा रेलवे स्टेशन से जोड़ने के लिए एलिवेटेड फोरलेन संपर्क मार्ग की स्वीकृति दी गई थी। उस समय यह परियोजना AIIMS के निर्धारित स्थान और उसके मानकों के अनुरूप तैयार की गई थी। उनका तर्क है कि उस दौर में सड़क का उद्देश्य सीधे AIIMS परिसर तक उच्च स्तरीय संपर्क उपलब्ध कराना था। प्रेस विज्ञप्ति में सबसे महत्वपूर्ण सवाल वर्ष 2023 में AIIMS के स्थान परिवर्तन को लेकर उठाया गया है। गामी का कहना है कि जब AIIMS परियोजना का स्थान बदलकर शोभन क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया, तब पुराने DMCH-AIIMS संपर्क मार्ग की मूल आवश्यकता स्वतः समाप्त हो गई। ऐसे में, यदि AIIMS अब पहले वाले स्थान पर नहीं बन रहा है, तो उसी परियोजना को नए नाम से आगे बढ़ाने का औचित्य क्या है? उनका दावा है कि यदि वास्तव में नई सड़क बनाई जा रही थी, तो नई परिस्थितियों के अनुसार नई DPR, नई स्वीकृति और नए तकनीकी मानकों के आधार पर पूरी प्रक्रिया दोबारा अपनाई जानी चाहिए थी।

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नाम बदलने के पीछे क्या छिपा है बड़ा सवाल: पूर्व विधायक का सबसे गंभीर आरोप यह है कि परियोजना का नाम बदलकर उसे 'दरभंगा AIIMS-अमास एक्सप्रेसवे' का स्वरूप दिया गया, जबकि AIIMS से उसका प्रत्यक्ष संबंध पहले जैसा नहीं रहा। उनका कहना है कि AIIMS का नाम जोड़कर परियोजना को अधिक महत्वपूर्ण दिखाने का प्रयास किया गया, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उनके अनुसार, यदि सड़क वास्तव में अमास एक्सप्रेसवे का हिस्सा है, तो उसे उसी स्वरूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, न कि AIIMS परियोजना से जोड़कर। गामी ने यह भी दावा किया है कि परियोजना के लिए कम दूरी वाले ग्रीनफील्ड संपर्क मार्ग का विकल्प उपलब्ध था, जिसे अपनाने से कम भूमि अधिग्रहण, कम लागत और कम सामाजिक प्रभाव पड़ता। लेकिन इसके बजाय पहले से भीड़भाड़ वाले मार्ग का विस्तार कर एलिवेटेड सड़क बनाने का निर्णय लिया गया। उनके अनुसार यह निर्णय तकनीकी आवश्यकता की बजाय किसी अन्य उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होता है।

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भीड़भाड़ वाले मार्ग पर एलिवेटेड सड़क, तकनीकी निर्णय या विवाद: प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रस्तावित सड़क दरभंगा शहर के अत्यधिक भीड़भाड़ वाले हिस्सों यानि बैता, लहेरियासराय टावर और हाजमा चौराहा से होकर गुजरती है। गामी का कहना है कि जिस मार्ग पर पहले से ट्रैफिक दबाव अत्यधिक है, उसी पर एलिवेटेड संरचना विकसित करने का निर्णय भविष्य में नई समस्याएं भी पैदा कर सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस परियोजना के कारण बड़ी संख्या में व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकानें और अन्य व्यवसाय प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि केवल भूमि अधिग्रहण का मुआवजा मिलने से वर्षों से स्थापित व्यापार दोबारा खड़ा नहीं किया जा सकता।

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फाइलों में हेरफेर और DPR पर गंभीर आरोप: पूर्व विधायक ने परियोजना की DPR (Detailed Project Report) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुरानी फाइलों के आधार पर नई परियोजना का स्वरूप तैयार किया गया और दस्तावेज़ों में ऐसा प्रस्तुत किया गया, मानो यह पूर्व स्वीकृत योजना का स्वाभाविक विस्तार हो। उन्होंने दावा किया है कि यदि यह वास्तव में नई परियोजना होती, तो उसके लिए नई स्वीकृति, नया तकनीकी परीक्षण और नई प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जाती। उनके अनुसार ऐसा नहीं किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है। प्रेस विज्ञप्ति में गामी ने यह आरोप भी लगाया है कि परियोजना में टेंडर प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न हैं। उन्होंने दावा किया कि जटिल और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में भी अपेक्षाकृत कम दर पर कार्य आवंटित किया गया, जिससे DPR की गुणवत्ता और परियोजना की वास्तविक लागत को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने विभाग, DPR एजेंसी और संवेदक के बीच कथित तालमेल का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र जांच अथवा सरकारी पुष्टि का उल्लेख प्रेस विज्ञप्ति में नहीं किया गया है।

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यह नई सड़क नहीं, बल्कि पुरानी फाइल का विस्तार: गामी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह पूरी परियोजना नई सड़क नहीं है, बल्कि पहले से स्वीकृत परियोजना का परिवर्तित और विस्तारित रूप है। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में नई सड़क बनाना चाहती, तो उसे वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप नई योजना बनानी चाहिए थी, ताकि अधिक से अधिक आबादी और क्षेत्रों को उसका लाभ मिल सके। पूर्व विधायक ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि जांच पूरी होने तक परियोजना से जुड़े किसी भी संवेदक को भुगतान नहीं किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी CAG, जिला प्रशासन तथा पथ निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि सार्वजनिक धन के उपयोग की निष्पक्ष समीक्षा हो सके।

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राजनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक: इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आरोप किसी विपक्षी नेता की ओर से नहीं, बल्कि ऐसे वरिष्ठ नेता की ओर से लगाए गए हैं जो स्वयं लंबे समय तक सत्ता पक्ष की राजनीति का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उनके सवाल केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया और परियोजना की पारदर्शिता पर गंभीर बहस खड़ी करते हैं। यदि इन आरोपों में तथ्यात्मक आधार पाया जाता है, तो यह मामला केवल एक सड़क परियोजना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी स्वीकृतियों, DPR निर्माण, सार्वजनिक धन के उपयोग और अधोसंरचना परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी व्यापक प्रश्न खड़े करेगा। हालांकि, यह उल्लेख करना आवश्यक है कि इस रिपोर्ट में वर्णित आरोप पूर्व विधायक अमरनाथ गामी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। इन आरोपों पर संबंधित विभाग या राज्य सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस समय उपलब्ध नहीं है। विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया हमारे द्वारा किया जाएगा।
