दरभंगा का राज किला बना नृत्य कला का स्वर्णिम मंदिर: बिहार की सबसे प्रेरक कार्यशाला ने रचा इतिहास

बिहार की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में एक नया इतिहास रचा जा रहा है, जहाँ ऐतिहासिक राज किला नृत्य कला का स्वर्णिम मंदिर बन गया है। सृष्टि फाउंडेशन द्वारा आयोजित नृत्य कार्यशाला ने न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश में अपनी छाप छोड़ी है, और इसे राज्य की अब तक की सबसे प्रेरक और भव्य नृत्य पहल माना जा रहा है. पढ़े पुरी खबर.......

दरभंगा का राज किला बना नृत्य कला का स्वर्णिम मंदिर: बिहार की सबसे प्रेरक कार्यशाला ने रचा इतिहास
दरभंगा का राज किला बना नृत्य कला का स्वर्णिम मंदिर: बिहार की सबसे प्रेरक कार्यशाला ने रचा इतिहास; फोटो: मिथिला जन जन की आवाज

दरभंगा: बिहार की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में एक नया इतिहास रचा जा रहा है, जहाँ ऐतिहासिक राज किला नृत्य कला का स्वर्णिम मंदिर बन गया है। सृष्टि फाउंडेशन द्वारा आयोजित नृत्य कार्यशाला ने न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश में अपनी छाप छोड़ी है, और इसे राज्य की अब तक की सबसे प्रेरक और भव्य नृत्य पहल माना जा रहा है। यह कार्यशाला कला, संस्कृति और युवा प्रतिभा के संगम का एक अनुपम उदाहरण बन गई है।

राज किला के भव्य परिसर में चल रही इस कार्यशाला में कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, लोक नृत्य और आधुनिक नृत्य जैसी शैलियों के विश्वविख्यात गुरु अपनी कला का जादू बिखेर रहे हैं। ओडिसी नृत्य के महान गुरु सचिकान्त प्रधान, जो ओडिशा के उत्कल विश्वविद्यालय से जुड़े हैं, बच्चों और युवाओं को नृत्य की गहराइयों में ले जा रहे हैं। उद्घाटन समारोह में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा, "यहाँ नृत्य सिर्फ कला नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव और आत्मिक आनंद का मार्ग है।"

सृष्टि फाउंडेशन के संस्थापक जयप्रकाश पाठक ने गर्व से बताया, "राज किला में यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जनन दे रहा है। यहाँ प्रशिक्षण ले रहे युवा कलाकार नृत्य की दुनिया में नए सितारे बनने को तैयार हैं।" सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि 29 मार्च को संध्याकाल में कामेश्वर सिंह विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के पास एक अद्भुत मुक्ताकाश नृत्योत्सव होगा, जहाँ ये कलाकार अपनी कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। यह नृत्योत्सव दरभंगा को देश के सांस्कृतिक नक्शे पर एक चमकता सितारा बनाएगा, और राज किला इस ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक बनकर उभरेगा।