तीन दिनों तक घर की चौखट पर लौटने की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठा परिवार, फिर गांव की धरती ने जेसीबी से खोदे गड्ढे के भीतर से उगला 18 वर्षीय राहुल का शव; शराब निकालने के आरोप से शुरू हुई रहस्यमयी कहानी में मारपीट, गुमशुदगी और मौत की खौफनाक कड़ियां तलाश रही पुलिस, आखिर उन तीन दिनों के अंधेरे में राहुल के साथ क्या हुआ...हर सवाल के जवाब पर टिकी गांव की सांसें

तीन दिन तक एक परिवार जिस उम्मीद के सहारे अपने 18 वर्षीय बेटे की तलाश में गांव की गलियों, रास्तों और संभावित ठिकानों की खाक छानता रहा, रविवार की सुबह उसी तलाश का अंत एक ऐसे दृश्य के साथ हुआ जिसने पूरे गांव को सन्न कर दिया। पकड़ी गांव में जेसीबी से खोदे गए एक गड्ढे से राहुल कुमार का शव बरामद होते ही इलाके में सनसनी फैल गई। जिस युवक के घर लौटने की राह उसकी आंखें निहार रही थीं, उसी युवक का निर्जीव शरीर गांव की जमीन के भीतर से सामने आया. पढ़े पूरी खबर....

तीन दिनों तक घर की चौखट पर लौटने की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठा परिवार, फिर गांव की धरती ने जेसीबी से खोदे गड्ढे के भीतर से उगला 18 वर्षीय राहुल का शव; शराब निकालने के आरोप से शुरू हुई रहस्यमयी कहानी में मारपीट, गुमशुदगी और मौत की खौफनाक कड़ियां तलाश रही पुलिस, आखिर उन तीन दिनों के अंधेरे में राहुल के साथ क्या हुआ...हर सवाल के जवाब पर टिकी गांव की सांसें
तीन दिनों तक घर की चौखट पर लौटने की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठा परिवार, फिर गांव की धरती ने जेसीबी से खोदे गड्ढे के भीतर से उगला 18 वर्षीय राहुल का शव; शराब निकालने के आरोप से शुरू हुई रहस्यमयी कहानी में मारपीट, गुमशुदगी और मौत की खौफनाक कड़ियां तलाश रही पुलिस

दरभंगा। तीन दिन तक एक परिवार जिस उम्मीद के सहारे अपने 18 वर्षीय बेटे की तलाश में गांव की गलियों, रास्तों और संभावित ठिकानों की खाक छानता रहा, रविवार की सुबह उसी तलाश का अंत एक ऐसे दृश्य के साथ हुआ जिसने पूरे गांव को सन्न कर दिया। पकड़ी गांव में जेसीबी से खोदे गए एक गड्ढे से राहुल कुमार का शव बरामद होते ही इलाके में सनसनी फैल गई। जिस युवक के घर लौटने की राह उसकी आंखें निहार रही थीं, उसी युवक का निर्जीव शरीर गांव की जमीन के भीतर से सामने आया।

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राहुल के लापता होने के बाद परिवार लगातार उसकी खोज में जुटा था। हर गुजरते घंटे के साथ उम्मीद और आशंका के बीच झूलते परिजनों को रविवार की सुबह जो सूचना मिली, उसने उनके पैरों तले की जमीन खिसका दी। गांव में जेसीबी से खोदे गए गड्ढे में शव मिलने की खबर फैलते ही घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। देखते ही देखते वहां भय, कौतूहल और सवालों का ऐसा घेरा बन गया, जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। मामला बहेड़ी थाना क्षेत्र के पकड़ी गांव का है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को गड्ढे से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी। अब जांच की दिशा उस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में लगी है, जो राहुल के घर से निकलने से लेकर उसके शव के बरामद होने तक फैला हुआ है।

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घर से निकला था राहुल, फिर लौटकर नहीं आया: परिजनों के अनुसार राहुल कुमार लुधियाना में एक निजी कंपनी में काम करता था और रक्षाबंधन से लगभग दस दिन पहले गांव आया था। रक्षाबंधन से एक दिन पहले वह घर लौट आया था। परिवार के लिए यह सामान्य पारिवारिक समय था, लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। आरोप है कि शुक्रवार को गांव के भोला मुखिया का पुत्र छोटू कुमार राहुल को मोबाइल टावर के पास छिपाकर रखी शराब निकालने के लिए ले गया था। परिवार का दावा है कि शराब निकालने की जानकारी कथित रूप से धंधेबाज शिव मुखिया को मिली और इसके बाद शिव मुखिया दोनों को अपने साथ ले गया। परिजनों के अनुसार कुछ देर बाद छोटू को छोड़ दिया गया, जबकि राहुल के साथ मारपीट किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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एक जवाब ने बढ़ा दी परिवार की बेचैनी: राहुल के बड़े भाई रवि ने जब शिव मुखिया से उसके बारे में पूछा तो कथित तौर पर बताया गया कि राहुल पैदल ही घर चला गया है। परिवार ने इस बात पर भरोसा करते हुए राहुल की तलाश शुरू की, लेकिन वह घर नहीं पहुंचा। इसके बाद शुरू हुई तलाश धीरे-धीरे बेचैनी में बदलती गई। परिजनों ने संभावित स्थानों पर खोजबीन की। गांव के रास्तों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की गई। लेकिन राहुल का कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतता गया और परिवार की चिंता गहराती चली गई। फिर रविवार की सुबह वह खबर सामने आई, जिसने तीन दिनों से चले आ रहे इंतजार को मातम में बदल दिया। रविवार सुबह जेसीबी से खोदे गए गड्ढे से राहुल का शव बरामद हुआ। यह वही गांव था, जहां राहुल के परिजन तीन दिनों से उसकी तलाश कर रहे थे। शव मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ खड़ा हुआ कि आखिर राहुल वहां तक कैसे पहुंचा?परिजनों ने आशंका जताई है कि यदि राहुल के साथ मारपीट हुई थी और वह गंभीर रूप से घायल हुआ था, तो संभव है कि उसे उसी गड्ढे में फेंका गया हो। मगर यह अभी परिजनों की आशंका और आरोप हैं। पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। यही कारण है कि इस पूरे मामले में हर दावा जांच के दायरे में है। राहुल की मौत किन परिस्थितियों में हुई, वह गड्ढे तक कैसे पहुंचा और उसके अंतिम समय में उसके साथ क्या हुआ....इन सवालों का उत्तर जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।

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गड्ढे से निकला शव, मगर सवाल जमीन के भीतर नहीं दबे: राहुल का शव बरामद हो गया, लेकिन उसके साथ जुड़े सवाल अब भी जिंदा हैं। क्या राहुल को वास्तव में शराब निकालने के लिए ले जाया गया था? अगर वह वहां गया था तो उसके बाद उसके साथ क्या हुआ? क्या उसके साथ मारपीट हुई? अगर हुई तो किस परिस्थिति में? वह गड्ढे तक कैसे पहुंचा? क्या उसे वहां ले जाया गया या किसी अन्य घटना के बाद शव वहां पहुंचा? इन तमाम सवालों के जवाब फिलहाल जांच की प्रतीक्षा में हैं। घटनास्थल का निरीक्षण, स्थानीय लोगों से पूछताछ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले की अगली कड़ियां तय कर सकती हैं।

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पुलिस की जांच पर टिकी निगाहें: बहेड़ी थानाध्यक्ष सूरज कुमार गुप्ता के अनुसार मामले की छानबीन की जा रही है। उन्होंने बताया कि स्वजन की ओर से अब तक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों को खंगाल रही है। पुलिस का कहना है कि राहुल की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। ऐसे में फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। पुलिस जांच के बाद ही यह सामने आएगा कि राहुल की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे वास्तव में क्या घटनाक्रम था। राहुल कुछ दिन पहले ही लुधियाना से अपने गांव लौटा था। परिवार के लिए उसका लौटना खुशी का अवसर रहा होगा। रक्षाबंधन के आसपास घर में भाई-बहन के स्नेह और मिलन की उम्मीद रही होगी। लेकिन कुछ ही दिनों में वही घर ऐसी खामोशी में डूब गया, जहां अब किसी के लौटने की प्रतीक्षा नहीं है। एक परिवार का 18 वर्षीय युवक तीन दिनों तक लापता रहा और फिर उसी गांव की जमीन के भीतर से उसका शव मिला। इस घटना ने केवल एक परिवार को नहीं झकझोरा, बल्कि पूरे गांव के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल की मौत का सच अभी जांच की परतों में छिपा है। लेकिन इतना जरूर है कि उसके शव की बरामदगी ने उस तीन दिन की गुमशुदगी को एक गंभीर रहस्य में बदल दिया है। अब निगाहें पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर हैं। क्योंकि इस मामले में सबसे जरूरी सवाल केवल यह नहीं कि राहुल की मौत कैसे हुई, बल्कि यह भी है कि उसके अंतिम घंटों में वास्तव में क्या हुआ था। इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पकड़ी गांव की इस भयावह घटना के पीछे महज एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था या फिर कोई ऐसी कड़ी, जिसे फिलहाल अंधेरे में छिपे रहस्य ने ढक रखा है।