जब माँ श्यामा के नाम से सजेगी दरभंगा की रातें, और भक्ति की लौ में चमकेगा माधेश्वर परिसर संजय सरावगी की पहल बनी 10 लाख की स्वीकृति का कारण, दो दिवसीय महोत्सव बनेगा गौरवगाथा
दरभंगा की माटी में जब भी श्रद्धा का स्वर फूटता है, तो माँ श्यामा के मंदिर से उठती घंटियों की अनुगूंज उसमें आत्मा का स्पर्श जोड़ देती है। माधेश्वर परिसर स्थित माँ श्यामा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि दरभंगा की आध्यात्मिक चेतना का केन्द्रीय बिंदु है, जहाँ भक्ति, संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम होता है। अब इस पुण्य भूमि पर एक बार फिर आस्था का उत्सव सजने जा रहा है "श्यामा महोत्सव". पढ़े पुरी खबर......

दरभंगा की माटी में जब भी श्रद्धा का स्वर फूटता है, तो माँ श्यामा के मंदिर से उठती घंटियों की अनुगूंज उसमें आत्मा का स्पर्श जोड़ देती है। माधेश्वर परिसर स्थित माँ श्यामा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि दरभंगा की आध्यात्मिक चेतना का केन्द्रीय बिंदु है, जहाँ भक्ति, संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम होता है। अब इस पुण्य भूमि पर एक बार फिर आस्था का उत्सव सजने जा रहा है "श्यामा महोत्सव"।
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राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए इस ऐतिहासिक आयोजन हेतु 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह जानकारी बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी ने स्वयं दी, और उनके स्वर में केवल घोषणा नहीं, बल्कि माँ श्यामा के चरणों में अर्पित एक संकल्प की झलक थी।
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मंत्री सरावगी ने बताया कि श्यामा महोत्सव एक दो-दिवसीय भव्य आयोजन होगा, जिसमें धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ तक, श्रद्धा के रंग में रँगे अनेक आयाम सम्मिलित होंगे। यह राशि महज सरकारी अनुदान नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास में प्राण फूँकने वाला एक प्रयास है। इसका उपयोग मंदिर परिसर की सजावट, विद्युत-प्रकाश व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी, दर्शनार्थियों की सुविधा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने में किया जाएगा।
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माँ श्यामा का यह मंदिर, जिसे कुछ लोग दरभंगा की "काशी" भी कहते हैं, केवल एक धरोहर नहीं, बल्कि पीढ़ियों से दरभंगा की आत्मा में गुँथा हुआ वह ताना-बाना है, जो संस्कृति, श्रद्धा और समाज को एक धागे में बाँधता है। यह महोत्सव उसी परंपरा का पुनर्जागरण होगा। संजय सरावगी ने अपने वक्तव्य में कहा, “दरभंगा की धरती हमेशा से धार्मिक चेतना की अग्रदूत रही है। माँ श्यामा महोत्सव इस पहचान को और अधिक उजागर करेगा। यह आयोजन न केवल भक्तों को भक्ति का रस देगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों, शिल्पियों और सांस्कृतिक धरोहरों को भी एक सशक्त मंच प्रदान करेगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि एनडीए सरकार राज्य में धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। माधेश्वर परिसर में माँ श्यामा मंदिर की गरिमा और दिव्यता को बनाये रखने के लिए वे व्यक्तिगत रूप से सतत प्रयासरत हैं।
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सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव: श्यामा महोत्सव केवल एक पूजा का आयोजन नहीं, बल्कि लोकजीवन की थमी हुई सांस्कृतिक नब्ज़ को फिर से स्पंदित करने का प्रयास है। इस आयोजन से जहाँ एक ओर श्रद्धालुओं को अध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय हस्तशिल्प, संगीत, लोकगीत और नृत्य को भी एक मंच मिलेगा। यह आयोजन सामाजिक समरसता और क्षेत्रीय एकता का प्रतीक बनेगा।
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आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण: इस आयोजन से स्थानीय व्यवसाय, छोटे दुकानदार, फूल विक्रेता, प्रसाद विक्रेता, प्रकाश सज्जा कर्मी और साउंड तकनीशियनों को रोज़गार मिलेगा। यह आयोजन न केवल धर्म का पर्व होगा, बल्कि गाँव-शहर की आर्थिक नाड़ी में भी संजीवनी भरने का कार्य करेगा। जब सर्द हवा के बीच मंदिर की घंटियाँ गूंजेंगी, जब दीपों की लड़ियाँ माधेश्वर परिसर को जगमगाएंगी, जब श्यामा नाम का उच्चारण गगन को भी भेदेगा तब समझिएगा, माँ श्यामा फिर एक बार अपने नगर में अवतरित हुई हैं।संजय सरावगी द्वारा लाया गया यह सहयोग कोई राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि माँ श्यामा के चरणों में एक विनम्र अर्पण है। यह 10 लाख की राशि दरभंगा के श्रद्धा संसार में नया प्रकाश भरने वाली चिंगारी है, जो महोत्सव के रूप में दीपोत्सव का स्वरूप लेगी।