"कुर्की का खौफ: थानाध्यक्ष दीपक का दबदबा, जितेंद्र ने मानी हार, कहा- 'अब बस करो, सरेंडर कर रहा हूँ!'"

(1)"शेर-दिल थानाध्यक्ष" - दीपक कुमार वो शख्स हैं, जो अपराधियों के दिल में खौफ और आम जनता के मन में भरोसा जगाते हैं। (2)"कानून का करिश्माई सिपाही" - जब दीपक मैदान में उतरते हैं, तो कुर्की का डर भी फरारियों को घुटनों पर ला देता है। (3)"दबंग दीपक" - एक नाम, जो अपराध की दुनिया में तूफान और पुलिस की वर्दी में इंसाफ का परचम लहराता है। (4)"हौसले का पहाड़" - मारपीट हो या अफवाह का शोर, दीपक कुमार हर चुनौती को चट्टान की तरह ठोक देते हैं। (5)"न्याय का नायक" - वर्दी में स्टाइल, आँखों में आग, और हाथ में कानून का डंडा- ये हैं हमारे थानाध्यक्ष साहब!.... पढ़े पुरी खबर......

"कुर्की का खौफ: थानाध्यक्ष दीपक का दबदबा, जितेंद्र ने मानी हार, कहा- 'अब बस करो, सरेंडर कर रहा हूँ!'"
"कुर्की का खौफ: थानाध्यक्ष दीपक का दबदबा, जितेंद्र ने मानी हार, कहा- 'अब बस करो, सरेंडर कर रहा हूँ!'" दीपक कुमार (फाइल फोटो )

दरभंगा के लहेरियासराय थाना क्षेत्र में एक ऐसा नजारा देखने को मिला कि लोग कहने लगे- "कानून का डंडा जब चलता है, तो पाताल में छुपा शैतान भी घुटने टेक देता है!" थानाध्यक्ष दीपक कुमार का नाम सुनते ही फरार आरोपी जितेंद्र कुमार यादव के पसीने छूट गए। कुर्की-जप्ती की खबर मिली, और बस एक घंटे में जितेंद्र हाथ जोड़कर थाने के सामने खड़ा था- "साहब, अब और नहीं भाग सकता, ले लो मुझे!"

मामला शुरू हुआ था जितेंद्र की पत्नी के दहेज उत्पीड़न और मारपीट के आरोपों से, जो समस्तीपुर व्यवहार न्यायालय तक जा पहुँचा। लहेरियासराय पुलिस जब गिरफ्तारी के लिए उसके घर पहुँची, तो घरवालों ने दारोगा आर.के. दुबे और अमित कुमार पर हमला बोल दिया। दोनों घायल हुए, लेकिन थानाध्यक्ष दीपक ने हार नहीं मानी। न्यायालय के आदेश पर कुर्की का डंडा उठा, और जितेंद्र की सिट्टी-पिट्टी गुम! घर से विदेशी शराब, कट्टा, तलवार, और हॉकी स्टिक तक बरामद हो गई- लगता है जितेंद्र कोई जंग की तैयारी कर रहा था, पर थानाध्यक्ष के आगे सारी हेकड़ी धरी की धरी रह गई।

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इधर, किसी शरारती ने अफवाह उड़ा दी कि जितेंद्र को गोली मार दी गई। बस फिर क्या, आक्रोशित भीड़ ने लहेरियासराय-समस्तीपुर मार्ग जाम कर दिया। 17 नामजद और डेढ़ सौ अज्ञात पर केस ठोंक दिया गया। लेकिन जैसे ही जितेंद्र ने सरेंडर किया, कुर्की रुकी और सड़क खुली। थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने कहा, "शराब और हथियार का हिसाब अलग से होगा, जितेंद्र अब कानून के हवाले है।"

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लोगों में चर्चा है- "ये है असली पुलिसिया दबदबा! पूर्वज कहते थे- कानून का हाथ लंबा होता है, और थानाध्यक्ष दीपक ने तो इसे साबित कर दिखाया।" अब जितेंद्र को समझ आ गया होगा कि पुलिस से आँखमिचौली खेलने का अंजाम अच्छा नहीं होता। तो भइया, अगली बार कोई गलत काम करने से पहले सोचना, कहीं थानाध्यक्ष दीपक का डंडा तुम्हारे दरवाजे पर न खटखटा दे!