शेर-दिल दीपक: शराब तस्करों की काली रात का अंत, कानून की हुंकार से माफिया परास्त

बिहार में शराबबंदी को मजाक समझने वाले माफिया को लहेरियासराय थाना के थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने ऐसा सबक सिखाया कि उनकी रूह कांप उठी। सोमवार को गुप्त सूचना पर चीते की फुर्ती से हरकत में आए दीपक कुमार ने अपनी टीम के साथ दो सटीक छापेमारियों में कुल 1022 बोतल विदेशी शराब का जखीरा पकड़ा और दो शातिर कारोबारियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. पढ़े पुरी खबर......

शेर-दिल दीपक: शराब तस्करों की काली रात का अंत, कानून की हुंकार से माफिया परास्त
शेर-दिल दीपक: शराब तस्करों की काली रात का अंत, कानून की हुंकार से माफिया परास्त; फोटो: मिथिला जन जन की आवाज

दरभंगा: बिहार में शराबबंदी को मजाक समझने वाले माफिया को लहेरियासराय थाना के थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने ऐसा सबक सिखाया कि उनकी रूह कांप उठी। सोमवार को गुप्त सूचना पर चीते की फुर्ती से हरकत में आए दीपक कुमार ने अपनी टीम के साथ दो सटीक छापेमारियों में कुल 1022 बोतल विदेशी शराब का जखीरा पकड़ा और दो शातिर कारोबारियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। यह कार्रवाई न सिर्फ पुलिस की साहसिकता का परिचय देती है, बल्कि थानाध्यक्ष दीपक कुमार को एक नवयुवक सिंह साबित करती है, जो अवैध धंधों के खिलाफ वन में गरज रहा है।

                                ADVERTISEMENT

पहला दांव: सड़क पर शराब तस्करों की हवा टाइट: सोमवार की सुबह, जब शहर अभी नींद से जाग भी नहीं था, दीपक कुमार की टीम ने लहेरियासराय के एक मोहल्ले में बिजली की तेजी से छापा मारा। बाकरगंज के सोनू कुमार (पिता: मनोज ठाकुर) और बलभद्रपुर के सुषम राज (पिता: इंद्रकांत झा) 553 बोतल विदेशी शराब के साथ रंगे हाथों धर लिए गए। चार कार्टन (84 बोतल, 36 लीटर) और एक स्कूटी (बीआर 06-2457) भी इनके कब्जे से छीनी गई। पूछताछ में दोनों ने कबूला कि वे बेलवागंज के अंधेरियाबाग के एक बड़े मगरमच्छ को शराब पहुंचाने की फिराक में थे। पुलिस को देखते ही ये चूहों की तरह भागे, मगर दीपक कुमार की बाज जैसी नजर और शिकारी चाल के आगे इनकी एक न चली।

                               ADVERTISEMENT

दूसरा वार: बंद घर में छिपा शराब का खजाना: पहले शिकार को ठिकाने लगाते ही थानाध्यक्ष दीपक कुमार को एक और गुप्त सुराग मिला। बेलवागंज, इस्माइलगंज में रामनाथ झा के बंद पड़े मकान में शराब का अड्डा चल रहा था। वहां किराएदार अनिकेत कुमार और प्रिंस कुमार (दोनों विनय लाल कर्ण के बेटे) ने घर को शराब का गोदाम बना रखा था। दीपक की टीम ने दरवाजा तोड़ा और अंदर से 469 बोतल विदेशी शराब (184 लीटर) बरामद की। यह देख माफिया के होश उड़ गए। अनिकेत और प्रिंस सहित कई नामों पर उत्पाद अधिनियम के तहत मुकदमा ठोंक दिया गया।

                                  ADVERTISEMENT

दीपक का मास्टरस्ट्रोक: हिरासत से लेकर जांच तक: पहली कार्रवाई के शिकार सोनू और सुषम को सोमवार को ही न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इनसे पूछताछ में शराब के काले कारोबार के और ठिकानों का खुलासा हुआ, जिसके बाद दीपक कुमार ने बिना वक्त गंवाए अगले निशाने पर छापेमारी शुरू कर दी। थानाध्यक्ष ने कहा, "शराब माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। यह जंग तब तक जारी रहेगी, जब तक आखिरी तस्कर जेल में न हो।" उनकी यह दहाड़ सुनकर शराब के सौदागरों में खलबली मच गई है।

                                ADVERTISEMENT

जनता बोली: "दीपक हैं दरभंगा के हीरो": स्थानीय लोग थानाध्यक्ष दीपक कुमार को "शराब का शिकारी" कहकर पुकार रहे हैं। उनकी इस बहादुरी और लगन ने न सिर्फ कानून का डर कायम किया, बल्कि शराबबंदी को हकीकत में बदलने का सपना दिखाया। एक नागरिक ने कहा, "दीपक जी जैसे अफसर हों, तो माफिया की शामत तय है।" पुलिस अब इस नेटवर्क के सरगना तक पहुंचने के लिए दिन-रात जुटी है।

                              ADVERTISEMENT

थानाध्यक्ष दीपक कुमार की यह कार्रवाई दरभंगा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी। एक ओर शराब माफिया की नींद हराम, दूसरी ओर जनता में खुशी की लहर—यह है दीपक कुमार का कमाल!