मिथिला जन जन की आवाज की पैनी क्राइम बीट रिपोर्ट दरभंगा पुलिस की सख़्त कार्रवाई में कोढ़ा गैंग के दो शातिर अपराधी दबोचे गए, चोरी की मोटरसाइकिल और मोबाइल संग पकड़े गए अपराधियों के पास मिला मास्टर चाभी, फर्जी आधार व नंबर प्लेट; भागलपुर, औरंगाबाद और दरभंगा तक फैला आपराधिक इतिहास भी बेनकाब

दरभंगा की सड़कों पर अपराधियों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं रहा। शहर की गलियों से लेकर हाईवे तक, पुलिस की पैनी नज़र हर उस शख्स पर टिकी है जो अपराध की छाया में जीने की कोशिश कर रहा है। 29 अगस्त 2025 की रात दरभंगा पुलिस ने यह साबित कर दिया कि अपराध कितना भी संगठित और चालाक क्यों न हो, कानून का शिकंजा उससे कहीं अधिक मजबूत और कठोर है। उस रात कोतवाली थाना की टीम ने जिस अंदाज़ में कोढ़ा गैंग के दो शातिर अपराधियों को पकड़कर सलाखों के पीछे पहुँचा दिया, वह दरभंगा पुलिस की कार्यशैली का एक ज़िंदा उदाहरण है. पढ़े पुरी खबर.......

मिथिला जन जन की आवाज की पैनी क्राइम बीट रिपोर्ट दरभंगा पुलिस की सख़्त कार्रवाई में कोढ़ा गैंग के दो शातिर अपराधी दबोचे गए, चोरी की मोटरसाइकिल और मोबाइल संग पकड़े गए अपराधियों के पास मिला मास्टर चाभी, फर्जी आधार व नंबर प्लेट; भागलपुर, औरंगाबाद और दरभंगा तक फैला आपराधिक इतिहास भी बेनकाब
मिथिला जन जन की आवाज की पैनी क्राइम बीट रिपोर्ट दरभंगा पुलिस की सख़्त कार्रवाई में कोढ़ा गैंग के दो शातिर अपराधी दबोचे गए, चोरी की मोटरसाइकिल और मोबाइल संग पकड़े गए अपराधियों के पास मिला मास्टर चाभी, फर्जी आधार व नंबर प्लेट; भागलपुर, औरंगाबाद और दरभंगा तक फैला आपराधिक इतिहास भी बेनकाब; फोटो: मिथिला जन जन की आवाज

दरभंगा की सड़कों पर अपराधियों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं रहा। शहर की गलियों से लेकर हाईवे तक, पुलिस की पैनी नज़र हर उस शख्स पर टिकी है जो अपराध की छाया में जीने की कोशिश कर रहा है। 29 अगस्त 2025 की रात दरभंगा पुलिस ने यह साबित कर दिया कि अपराध कितना भी संगठित और चालाक क्यों न हो, कानून का शिकंजा उससे कहीं अधिक मजबूत और कठोर है। उस रात कोतवाली थाना की टीम ने जिस अंदाज़ में कोढ़ा गैंग के दो शातिर अपराधियों को पकड़कर सलाखों के पीछे पहुँचा दिया, वह दरभंगा पुलिस की कार्यशैली का एक ज़िंदा उदाहरण है।

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29 अगस्त की रात जब वाहन चेकिंग ने बदल दी कहानी:

समय: रात के 8 बजकर 15 मिनट।

स्थान: सदर अनुमंडल, कोतवाली थाना क्षेत्र।

शहर के मुख्य मार्ग पर पुलिस टीम रूटीन की तरह वाहन चेकिंग कर रही थी। गाड़ियों की बारीकी से तलाशी ली जा रही थी। हर नंबर प्लेट, हर कागज़ात, हर चेहरा पुलिस की तेज़ निगाहों से गुज़र रहा था। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक पुलिस की नज़र में आए। उनका हावभाव सामान्य नहीं था। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया। गाड़ी रोकी गई। ड्राइविंग लाइसेंस और कागज़ात मांगे गए। दोनों की घबराहट साफ़ थी। जब गाड़ी का नंबर जांचा गया तो मामला खुलने लगा। यह गाड़ी चोरी की निकली। तलाशी ली गई तो एक चोरी का मोबाइल, एक सोने जैसा चैन, एक फर्जी आधार कार्ड, फर्जी नंबर प्लेट और सबसे खतरनाक एक मास्टर चाभी मिली। मास्टर चाभी की बरामदगी ने यह साफ़ कर दिया कि ये दोनों साधारण चोर नहीं, बल्कि संगठित तरीके से वाहनों की चोरी करने वाला गिरोह है।

गिरफ्तार अपराधियों की पहचान: पुलिस ने दोनों को मौके पर गिरफ्तार किया। पूछताछ और कागज़ात से उनकी पहचान हुई:

1.सॉमियल कुमार, उम्र– 20 वर्ष, पिता – धर्मेन्द्र यादव।

2.रोहित यादव उर्फ राकेश कुमार, उम्र- 40 वर्ष, पिता– हुरिया यादव।

दोनों का पता: नया टोला, जुराबगंज, थाना – कोढ़ा, जिला– कटिहार।

कोढ़ा इलाका लंबे समय से संगठित अपराधों के लिए बदनाम रहा है। यहाँ से निकलने वाला हर दूसरा गैंग चोरी, डकैती और ठगी जैसे मामलों में शामिल पाया जाता है। दरभंगा पुलिस ने इन दोनों को पकड़कर एक बड़े नेटवर्क पर चोट की है।

बरामद सामान अपराध की तस्वीर:

गिरफ्तारी के समय जो सामान बरामद हुआ, वह अपराध की गहराई को बयां करता है:

एक चोरी का मोबाइल

एक चोरी की मोटरसाइकिल

सोने जैसा एक चैन

मास्टर चाभी

फर्जी आधार कार्ड

फर्जी नंबर प्लेट

हर बरामद सामान के पीछे अपराध की एक लंबी कहानी छुपी हुई है।

मोटरसाइकिल– शहर से चोरी कर दूसरे ज़िले में बेचने की साजिश।

मोबाइल– जेबकटी या वाहन चोरी के दौरान लूटा गया।

मास्टर चाभी– अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार।

किसी भी बाइक या स्कूटर को मिनटों में खोलकर गायब कर देने की क्षमता।

फर्जी आधार कार्ड और नंबर प्लेट– पहचान छुपाने और पुलिस को गुमराह करने का जरिया।

आपराधिक इतिहास बार-बार का अपराध, अलग-अलग ज़िले: दरभंगा पुलिस जब अपराधियों के पुराने रिकॉर्ड खंगालने लगी, तो उनका काला इतिहास सामने आया।

1.पिरपैती थाना (भागलपुर)

   कांड संख्या – 232/24

   दिनांक – 03.05.2024

   धाराएँ – 392/467/468/471/414/412 भा.द.वि.

     यह मामला डकैती और जालसाजी से जुड़ा था।

2. नगर थाना (औरंगाबाद)

   कांड संख्या – 662/24

   दिनांक – 18.09.2024

   धारा – 304(2) B.N.S. 2023

 यह हत्या से जुड़ा मामला था, जो अपराधियों के खतरनाक मिज़ाज को दर्शाता है।

3. कोतवाली थाना (दरभंगा)

   कांड संख्या – 75/25

   दिनांक – 29.08.2025

   धारा – 304(2) B.N.S. 2023

इतिहास यह साबित करता है कि ये अपराधी केवल एक-दो बार चोरी में पकड़े जाने वाले साधारण चोर नहीं, बल्कि पेशेवर अपराधी हैं जिनका नेटवर्क कई ज़िलों तक फैला हुआ है।

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पुलिस टीम जिन्होंने ऑपरेशन को अंजाम दिया: इस पूरी कार्रवाई का श्रेय कोतवाली थाना की टीम को जाता है।

थानाध्यक्ष, पु.अ.नि. नीतीश कुमार– जिन्होंने ऑपरेशन की कमान संभाली।

पु.अ.नि. ओमप्रकाश कुमार– जिनकी सतर्कता ने गिरफ्तारी को आसान बनाया।

स.अ.नि. सुनंदा कुमारी– जिन्होंने मौके पर सर्च और जब्ती में अहम भूमिका निभाई।

PTC मुकेश कुमार– तकनीकी सहयोग और दस्तावेज़ीकरण में सक्रिय रहे।

DAP सुधीर कुमार– जिन्होंने पीछा करने और दबिश देने में तत्परता दिखाई।

BHG सलीम परवेज– जिन्होंने पूरे ऑपरेशन में मजबूती से सहयोग किया।

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कांड संख्या 76/25 – कानूनी शिकंजा कसना शुरू:

गिरफ्तारी के बाद दोनों अपराधियों पर कोतवाली थाना कांड संख्या 76/25, दिनांक 29.08.2025 दर्ज किया गया है।

धाराएँ – 318(4)/317(4)/317(5)/338/336(3)/3(5) B.N.S. 2023।

यह धाराएँ चोरी, धोखाधड़ी, जालसाजी और संगठित अपराध से जुड़ी हैं। पुलिस अब इनसे गहन पूछताछ कर रही है ताकि इनके नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुँचा जा सके।

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कोढ़ा गैंग का पर्दाफाश अपराध की जड़ें कहाँ तक?

कोढ़ा गैंग लंबे समय से कटिहार, भागलपुर, औरंगाबाद और अब दरभंगा तक फैला हुआ है। यह गैंग वाहनों की चोरी, मोबाइल लूट, नकली दस्तावेज़ बनाने और ठगी में सक्रिय पाया गया है। इनके तार बिहार के कई ज़िलों से जुड़े हैं। दरभंगा पुलिस की यह कार्रवाई केवल दो अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि इस गैंग की जड़ें हिलाने वाली कार्रवाई है।