पढ़िए... मिथिला जन जन की आवाज़ की विस्तृत रिपोर्ट वर्षों के अथक संघर्ष और आंदोलन के बाद अभाविप की ऐतिहासिक जीत, दरभंगा विश्वविद्यालय के 14 महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर शिक्षा का शुभारंभ, कुलपति प्रो. संजय चौधरी का सम्मान और परिसर में बंटे उल्लास के लड्डू
दरभंगा और सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए यह अवसर ऐतिहासिक और मील का पत्थर सिद्ध होने वाला है। वर्षों से छात्र समुदाय, अभिभावक और शिक्षाविद् लगातार यह मांग कर रहे थे कि दरभंगा विश्वविद्यालय के विभिन्न स्नातक महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई शुरू हो। इस दिशा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने लगातार संघर्ष किया। धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और शैक्षणिक संवाद की लम्बी श्रृंखला के बाद आखिरकार कुलपति प्रोफेसर संजय चौधरी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से इस मांग को पूरा किया। परिणामस्वरूप दरभंगा विश्वविद्यालय के 14 कॉलेजों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई प्रारम्भ होने जा रही है. पढ़े पुरी खबर......

दरभंगा और सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए यह अवसर ऐतिहासिक और मील का पत्थर सिद्ध होने वाला है। वर्षों से छात्र समुदाय, अभिभावक और शिक्षाविद् लगातार यह मांग कर रहे थे कि दरभंगा विश्वविद्यालय के विभिन्न स्नातक महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई शुरू हो। इस दिशा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने लगातार संघर्ष किया। धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और शैक्षणिक संवाद की लम्बी श्रृंखला के बाद आखिरकार कुलपति प्रोफेसर संजय चौधरी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से इस मांग को पूरा किया। परिणामस्वरूप दरभंगा विश्वविद्यालय के 14 कॉलेजों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई प्रारम्भ होने जा रही है। यह निर्णय न केवल शिक्षा के स्तर को ऊँचाई देगा, बल्कि पलायन की समस्या से जूझ रहे हजारों छात्रों के जीवन को भी नई दिशा देगा। इस महत्वपूर्ण सफलता को अभाविप ने उत्सव के रूप में मनाया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति और अन्य प्रशासनिक पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया तथा मिठाई बाँटकर छात्रों में खुशियाँ साझा की गईं।
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संघर्ष की पृष्ठभूमि: आंदोलन की यात्रा: अभाविप दरभंगा इकाई ने पिछले कई वर्षों से लगातार इस मुद्दे को उठाया था। छात्रों को स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा के लिए पटना, दिल्ली, वाराणसी या अन्य महानगरों का रुख करना पड़ता था। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता था, बल्कि प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का स्थानीय क्षेत्र से पलायन भी होता था। अभाविप नेताओं ने पाँच बार कुलपति से मिलकर ज्ञापन सौंपा। प्रत्येक बार मांग को मजबूती से रखा गया। कभी धरना के रूप में, तो कभी रैली और प्रदर्शन के जरिए। यह आंदोलन पूरी तरह से छात्रहित और शिक्षा के अधिकार पर केन्द्रित रहा।
कार्यक्रम का विवरण: सम्मान और उल्लास का माहौल: स्नातकोत्तर की पढ़ाई शुरू होने की घोषणा के बाद विश्वविद्यालय परिसर में अभाविप कार्यकर्ताओं ने कुलपति प्रो. संजय चौधरी का जोरदार स्वागत किया। उन्हें पुष्पगुच्छ, मिथिला की परंपरा अनुसार पाग और चादर पहनाकर सम्मानित किया गया। इसके बाद विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। पूरे कार्यक्रम में उत्साह का वातावरण था। मिठाई बाँटकर यह खुशी सभी के बीच साझा की गई।
वक्ताओं के वक्तव्य और उनका महत्व:
उत्सव पराशर (अभाविप प्रदेश सह-मंत्री): उन्होंने कहा कि यह सफलता लंबे आंदोलन और संघर्ष का परिणाम है। विद्यार्थी परिषद ने हमेशा छात्रहित को सर्वोपरि रखा है। स्नातकोत्तर शिक्षा शुरू होने से हजारों छात्रों को फायदा मिलेगा और यह निर्णय मिथिला क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक है।
वागीश झा (अभाविप जिला संयोजक): उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार पाँच बार कुलपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया। यह आसान यात्रा नहीं थी। हर बार प्रशासनिक अड़चनें सामने आईं, परंतु अभाविप ने हार नहीं मानी। आज यह आंदोलन अपने लक्ष्य की ओर बढ़ चुका है।
नवनीत रंजन (अभाविप नगर सह मंत्री): नवनीत रंजन ने कहा कि यह निर्णय न केवल शिक्षा के स्तर को ऊँचाई देगा, बल्कि पलायन को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अब छात्रों को बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी।
प्रियांशु चौधरी (अभाविप नगर संगठन मंत्री): प्रियांशु चौधरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल पढ़ाई शुरू करवाना ही नहीं है, बल्कि शिक्षा को सशक्त और सुलभ बनाना है। विज्ञान विषयों में भी स्नातकोत्तर की पढ़ाई जल्द शुरू कराने की दिशा में परिषद लगातार प्रयासरत है।
स्थानीय समाज और शिक्षा पर प्रभाव: छात्रों पर असर- हजारों छात्र-छात्राओं को अब स्नातकोत्तर की पढ़ाई अपने ही क्षेत्र में करने का अवसर मिलेगा। इससे शिक्षा का खर्च कम होगा और छात्र अपने परिवारों के साथ रहकर पढ़ाई कर सकेंगे।
अभिभावकों की खुशी: अभिभावकों के लिए यह निर्णय बड़ी राहत लेकर आया है। पहले वे आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान रहते थे, क्योंकि बच्चों को महानगरों में भेजना उनकी मजबूरी थी। अब यह दबाव कम होगा।
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स्थानीय विकास: दरभंगा और मिथिला क्षेत्र की पहचान शिक्षा और संस्कृति से रही है। स्नातकोत्तर शिक्षा शुरू होने से यहाँ का शैक्षणिक स्तर और भी समृद्ध होगा।
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भविष्य की चुनौतियाँ और संकल्प: हालाँकि यह निर्णय बड़ा है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियाँ शेष हैं। विज्ञान विषयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई शुरू करना। गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की नियुक्ति। आवश्यक संसाधन और अधोसंरचना का विकास। अभाविप ने संकल्प लिया है कि इन चुनौतियों से भी जूझा जाएगा और दरभंगा विश्वविद्यालय को देश के प्रमुख शैक्षणिक केन्द्रों में स्थापित किया जाएगा।
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संघर्ष से सफलता तक: अभाविप का यह आंदोलन एक उदाहरण है कि कैसे संगठित प्रयास, निरंतर संघर्ष और छात्रहित के प्रति समर्पण से बड़ी से बड़ी मांग पूरी हो सकती है। दरभंगा विश्वविद्यालय के 14 कॉलेजों में स्नातकोत्तर शिक्षा की शुरुआत केवल एक निर्णय नहीं है, बल्कि यह मिथिला की शिक्षा, संस्कृति और भविष्य को नई ऊर्जा देने वाला अध्याय है। यह अवसर केवल अभाविप की जीत नहीं, बल्कि हर छात्र, अभिभावक और समाज की जीत है।