दरभंगा में एटीएम बना अपराधियों का शिकारगाह: कहीं मशीनें काटी जा रहीं हैं, कहीं दीवार पर लिखा एक नंबर मिनटों में निगल रहा है जिंदगी भर की कमाई CCTV में कैद चेहरे, खाली होते खाते और कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल। पढ़िए… ताज़ा मामला इसी थाने क्षेत्र में क्या हुआ...
यह कोई साधारण संयोग नहीं है। यह कोई इक्का-दुक्का घटना भी नहीं। यह एक खामोश लेकिन खौफनाक अपराध-श्रृंखला है, जो शहर के अलग-अलग इलाकों में अलग तरीकों से एक ही मकसद के लिए फैल रही है लोगों की मेहनत की कमाई लूटने के लिए। एक ओर विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के लक्ष्मीसागर में एक्सिस बैंक के एटीएम को काटकर उखाड़ ले जाने की साजिश, तो दूसरी ओर विश्वविद्यालय और लहेरियासराय थाना क्षेत्र में दीवार पर लिखे एक फर्जी “हेल्पलाइन नंबर” के जरिए खातों को मिनटों में खाली करने वाला गिरोह।तरीके अलग हैं, लेकिन अपराध की आत्मा एक ही है सिस्टम को चुनौती, पुलिस को चकमा और आम आदमी को शिकार. पढ़े पूरी रिपोर्ट.......
दरभंगा। यह कोई साधारण संयोग नहीं है। यह कोई इक्का-दुक्का घटना भी नहीं। यह एक खामोश लेकिन खौफनाक अपराध-श्रृंखला है, जो शहर के अलग-अलग इलाकों में अलग तरीकों से एक ही मकसद के लिए फैल रही है लोगों की मेहनत की कमाई लूटने के लिए। एक ओर विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के लक्ष्मीसागर में एक्सिस बैंक के एटीएम को काटकर उखाड़ ले जाने की साजिश, तो दूसरी ओर विश्वविद्यालय और लहेरियासराय थाना क्षेत्र में दीवार पर लिखे एक फर्जी “हेल्पलाइन नंबर” के जरिए खातों को मिनटों में खाली करने वाला गिरोह।तरीके अलग हैं, लेकिन अपराध की आत्मा एक ही है सिस्टम को चुनौती, पुलिस को चकमा और आम आदमी को शिकार।

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रात के अंधेरे में मशीनों पर हमला, सुबह शहर में दहशत: गुरुवार की देर रात। लक्ष्मीसागर इलाका नींद में डूबा हुआ था। उसी अंधेरे में कुछ साए एक्सिस बैंक के एटीएम के पास पहुंचे। लोहे को काटने वाली मशीनें चलीं। चिंगारियां उड़ीं। एटीएम का अगला हिस्सा बेरहमी से काटा गया।सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखता है कई बदमाश, पूरी तैयारी के साथ, रुपये वाले बॉक्स को अलग करने की कोशिश में लगे थे। यह कोई जल्दबाजी नहीं थी, यह प्रैक्टिस किया हुआ अपराध था। लेकिन तभी सड़क पर हलचल बढ़ी। गश्ती दल की मौजूदगी का आभास हुआ। और बदमाश अंधेरे में घुलते चले गए। सुबह जब लोग रुपये निकालने पहुंचे, तो सामने था कटा-फटा एटीएम और सुरक्षा व्यवस्था की लाश।

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लाखों ले गए अफवाहों का बाजार, डर का माहौल: लक्ष्मीसागर में खबर आग की तरह फैली लाखों रुपये लूट लिए गए। लोगों के चेहरे पर डर था, गुस्सा था और सवाल थे। हालांकि पुलिस जांच में रुपये सुरक्षित पाए गए, लेकिन सवाल यह नहीं था कि रुपये गए या नहीं, सवाल यह था कि अगर बदमाश पूरी रात मशीन काट सकते हैं, तो अगली बार क्या होगा?

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अब दूसरा चेहरा: दीवार पर लिखा नंबर, और मिनटों में साफ होता बैंक अकाउंट: इसी शहर में, इसी वक्त, इसी सिस्टम के नीचे एक और अपराध चुपचाप पनप रहा था।एटीएम फ्रॉड का नया और खतरनाक तरीका, अब बदमाश मशीन नहीं काट रहे, वे इंसान की मजबूरी काट रहे हैं। एटीएम से छेड़छाड़। दीवार पर एक “हेल्पलाइन नंबर” चिपका दिया जाता है। जैसे ही कोई ग्राहक कार्ड डालता है कार्ड मशीन में फंस जाता है। घबराया हुआ ग्राहक दीवार पर लिखे नंबर पर कॉल करता है। उधर से आवाज आती है हम बैंक से बोल रहे हैं… मदद मिल जाएगी… और यहीं से शुरू होता है खाते के कत्ल का खेल।

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पहली वारदात: बेला सुंदरपुर, 33,500 रुपये गायब: तीन जनवरी। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र। बेला सुंदरपुर स्थित एचडीएफसी बैंक का एटीएम। कादिराबाद निवासी विमल कुमार सिंह रुपये निकालने पहुंचे। कार्ड डाला और कार्ड फंस गया। दीवार पर लिखे नंबर पर कॉल किया।सामने से खुद को बैंककर्मी बताने वाले व्यक्ति ने पुराने बस स्टैंड के पास बुलाया। पीड़ित वहां पहुंचे। कोई नहीं मिला। वापस लौटे कार्ड गायब। और तभी मोबाइल पर मैसेज 33,500 रुपये की निकासी।

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दूसरी वारदात: शाहगंज से बलभद्रपुर, दो लाख चार हजार की उड़ान: पुलिस अभी पहली घटना को समझ ही रही थी कि चार जनवरी को दूसरी वारदात हो गई।लहेरियासराय थाना क्षेत्र। शाहगंज बेंता निवासी अभयनाथ झा। बलभद्रपुर स्थित एचडीएफसी बैंक एटीएम में कार्ड फंसा। दीवार पर लिखा नंबर। फोन किया। इस बार बदमाश खुद आए। दो युवक। बाहर ले जाकर पूछताछ। और उसी दौरान 2,04,000 रुपये खाते से ट्रांसफर। फिर कार्ड हाथ में थमाया गया, और अपराधी हवा हो गए।

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सीसीटीवी में कैद चेहरा, लेकिन गिरफ्तारी शून्य: दो थाना क्षेत्र। दो बड़े फ्रॉड। सीसीटीवी फुटेज मौजूद। फिर भी अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं। साइबर थानाध्यक्ष सह डीएसपी विपिन बिहारी मानते हैं कि शहर में इस तरह की दो घटनाएं हो चुकी हैं और फुटेज खंगाले जा रहे हैं।लेकिन सवाल यह है जब चेहरा कैमरे में कैद है, तो अपराधी खुले में कैसे हैं?

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एक शहर, दो अपराध, और सिस्टम की एक ही कमजोरी: कहीं एटीएम काटे जा रहे हैं, कहीं दीवार पर लिखा नंबर बैंक अकाउंट साफ कर रहा है, कहीं सीसीटीवी सब देख रहा है, और कहीं फाइलें खामोश हैं।दरभंगा के एटीएम अब सिर्फ मशीन नहीं रहे, वे अपराध की प्रयोगशाला बन चुके हैं। लक्ष्मीसागर का कटा हुआ एटीएम और बेला सुंदरपुर-बलभद्रपुर के खाली खाते एक ही कहानी कहते हैं अपराधी एक कदम आगे हैं, सिस्टम एक कदम पीछे।

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पुलिस का बयान: जल्द गिरफ्तारी का दावा: विश्वविद्यालय थाना के थानाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाशों की पहचान और सत्यापन किया जा रहा है। बहुत जल्द सभी अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। एटीएम के अंदर रखे रुपये पूरी तरह सुरक्षित हैं, केवल आगे का भाग क्षतिग्रस्त हुआ है। वहीं सदर एसडीपीओ राजीव कुमार ने कहा कि गश्ती दल को देख बदमाश फरार हो गए। मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। एटीएम के बॉक्स को तोड़ने की कोशिश की गई है, जिसे गंभीरता से लिया गया है।

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अंतिम सवाल अगला शिकार कौन: आज यह विमल कुमार सिंह हैं। आज यह अभयनाथ झा हैं। आज यह लक्ष्मीसागर का एटीएम है। कल किसका नंबर लगेगा दीवार पर? किसका कार्ड फंसेगा मशीन में? और किसकी मेहनत की कमाई मिनटों में गायब होगी? दरभंगा डर के साए में है, और एटीएम अब भरोसे की नहीं, खौफ की मशीन बनते जा रहे हैं।
