31 दिसंबर की विदाई, 1 जनवरी की अनिश्चितता और फिर सत्ता परिवर्तन 20 घंटे तक मुखिया विहीन रहा उत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल, सेवानिवृत्त हुईं प्राचार्य डॉ. अलका झा और अधीक्षक डॉ. शीला कुमारी, देर शाम सरकार की अधिसूचना से डॉ. यू.सी. झा बने नए प्रिंसिपल और डॉ. जगदीश चंद्र को मिली अधीक्षक की कमान, उम्मीदों के साथ डर भी कि क्या संभल पाएगा DMCH?

उत्तर बिहार के सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले इलाज के किले दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) ने नए साल की पहली सुबह एक ऐसे मोड़ पर कदम रखा, जहाँ उम्मीद और आशंका, भरोसा और भय… सब कुछ एक साथ खड़ा दिखाई दिया। 31 दिसंबर 2025 की आधी रात जैसे ही घड़ी ने रिटायरमेंट की आख़िरी सेकेंड गिनी, वैसे ही DMCH की सत्ता-रेखा एक पल के लिए खाली हो गई और इसी खालीपन ने अस्पताल की धड़कनों को करीब 20 घंटे तक असहज और अस्थिर बनाए रखा. पढ़े पूरी खबर.......

31 दिसंबर की विदाई, 1 जनवरी की अनिश्चितता और फिर सत्ता परिवर्तन 20 घंटे तक मुखिया विहीन रहा उत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल, सेवानिवृत्त हुईं प्राचार्य डॉ. अलका झा और अधीक्षक डॉ. शीला कुमारी, देर शाम सरकार की अधिसूचना से डॉ. यू.सी. झा बने नए प्रिंसिपल और डॉ. जगदीश चंद्र को मिली अधीक्षक की कमान, उम्मीदों के साथ डर भी कि क्या संभल पाएगा DMCH?
31 दिसंबर की विदाई, 1 जनवरी की अनिश्चितता और फिर सत्ता परिवर्तन 20 घंटे तक मुखिया विहीन रहा उत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल, सेवानिवृत्त हुईं प्राचार्य डॉ. अलका झा और अधीक्षक डॉ. शीला कुमारी, देर शाम सरकार की अधिसूचना से डॉ. यू.सी. झा बने नए प्रिंसिपल और डॉ. जगदीश चंद्र को मिली अधीक्षक की कमान, उम्मीदों के साथ डर भी कि क्या संभल पाएगा DMCH?

दरभंगा। बिग स्पेशल रिपोर्ट: उत्तर बिहार के सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले इलाज के किले दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) ने नए साल की पहली सुबह एक ऐसे मोड़ पर कदम रखा, जहाँ उम्मीद और आशंका, भरोसा और भय… सब कुछ एक साथ खड़ा दिखाई दिया। 31 दिसंबर 2025 की आधी रात जैसे ही घड़ी ने रिटायरमेंट की आख़िरी सेकेंड गिनी, वैसे ही DMCH की सत्ता-रेखा एक पल के लिए खाली हो गई और इसी खालीपन ने अस्पताल की धड़कनों को करीब 20 घंटे तक असहज और अस्थिर बनाए रखा।

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एक रात, जब DMCH बिना मुखिया के था… 31 दिसंबर को DMCH की प्राचार्य सह प्रोफेसर डॉ. अलका झा और अधीक्षक सह प्रोफेसर डॉ. शीला कुमारी के सेवानिवृत्त होते ही, नए वर्ष के पहले दिन अस्पताल में एक अजीब-सी खामोशी पसर गई। मरीज आते रहे, ऑपरेशन होते रहे, इमरजेंसी चलती रही लेकिन नेतृत्व शून्य था। स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना आने में हुई देरी ने यह सवाल खड़ा कर दिया अगर इन 20 घंटों में कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो ज़िम्मेदार कौन होता?

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शाम ढलते-ढलते आई अधिसूचना, तब जाकर लौटी सांस: 1 जनवरी 2026 की देर शाम बिहार सरकार, स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना सामने आई और उसी काग़ज़ ने DMCH को नया चेहरा, नई पहचान और नई दिशा दे दी। डॉ. यूसी. झा बने दरभंगा मेडिकल कॉलेज के नए प्राचार्य (Principal) डॉ. जगदीश चंद्र को सौंपा गया अस्पताल अधीक्षक (Superintendent) का दायित्व।

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(अधिसूचना संख्या 17/विविध 01-157/2025, दिनांक 01.01.2026): जैसे ही आदेश जारी हुआ, अस्पताल परिसर में राहत की लहर दौड़ गई। डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने दोनों नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाइयाँ दीं लेकिन इसके साथ ही एक भारी अपेक्षा और डर भी जुड़ गया। कौन हैं नए चेहरे डॉ. यूसी. झा.... DMCH के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष, अनुभवी चिकित्सक और शैक्षणिक जगत का जाना-पहचाना नाम। उन्हें ऐसे समय में प्राचार्य बनाया गया है, जब मेडिकल कॉलेज पर सवाल भी हैं और उम्मीदें भी। डॉ. जगदीश चंद्र.... सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष, ऑपरेशन थिएटर से लेकर प्रशासनिक फाइलों तक की समझ रखने वाले वरिष्ठ चिकित्सक। अब वही DMCH की रोज़मर्रा की धड़कनों के संरक्षक होंगे।

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डॉ. शीला कुमारी का कार्यकाल: विकास की कहानी: सेवानिवृत्त अधीक्षक डॉ. शीला कुमारी का कार्यकाल DMCH के इतिहास में सिर्फ एक प्रशासनिक अध्याय नहीं, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधा विस्तार की मिसाल माना जा रहा है। उनके कार्यकाल में न्यू सर्जिकल बिल्डिंग में इमरजेंसी सहित कई विभागों का स्थानांतरण नए ऑपरेशन थिएटर का संचालन, जर्जर भवन से ब्लड बैंक को आधुनिक न्यू सर्जिकल बिल्डिंग में शिफ्ट, लेप्रोस्कॉपी, ब्रोंकियोस्कोपी, अफेरेसिस, सीबीनेट जैसी आधुनिक मशीनों की शुरुआत इन सुविधाओं ने DMCH को सिर्फ दरभंगा नहीं, बल्कि पूरा उत्तर बिहार के लिए जीवन रेखा बनाया।

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अब आगे… जिम्मेदारी भारी है: अब सवाल सिर्फ नियुक्ति का नहीं है सवाल है क्या DMCH इस रफ्तार को बनाए रख पाएगा? क्या नए नेतृत्व के दौर में व्यवस्था सुधरेगी या फिर वही पुरानी अव्यवस्थाएँ लौटेंगी? क्या मरीजों को इलाज मिलेगा या काग़ज़ों में सुधार सिमट जाएगा? नए प्राचार्य डॉ. यू. सी. झा और अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र के सामने चुनौती सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि विश्वास बचाने की है। क्योंकि DMCH सिर्फ एक अस्पताल नहीं यह उम्मीद है… यह आख़िरी सहारा है… और अगर यहाँ व्यवस्था लड़खड़ाई, तो उसका असर पूरे उत्तर बिहार की सांसों पर पड़ेगा।