कोहरे की आड़ में पुआल के नीचे छिपाई गई थी नए साल की नशे की साज़िश, लेकिन कानून की आंखें जागती रहीं घनश्यामपुर में 1260 बोतल नेपाली शराब जब्त, फरारी की कोशिश नाकाम, थानाध्यक्ष आलोक कुमार की सख़्ती से तस्कर सलाखों के पीछे; दो टूक चेतावनी कितना भी बड़ा रसूखदार हो, शराब बेचेगा तो जेल जाएगा.....

दरभंगा जिले के घनश्यामपुर थाना क्षेत्र में सोमवार की देर रात जो कुछ हुआ, वह महज़ एक बरामदगी नहीं थी यह शराब माफिया के विरुद्ध खुले युद्ध का ऐलान था।कोहरे की चादर ओढ़े अपराधियों ने सोचा था कि पुआल के नीचे छिपाई गई नेपाली शराब की यह खेप नए साल में ज़हर बनकर बिकेगी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि कानून की आंखें आज भी जाग रही हैं और उन आंखों का नाम है थानाध्यक्ष आलोक कुमार. पढ़े पूरी खबर......

कोहरे की आड़ में पुआल के नीचे छिपाई गई थी नए साल की नशे की साज़िश, लेकिन कानून की आंखें जागती रहीं घनश्यामपुर में 1260 बोतल नेपाली शराब जब्त, फरारी की कोशिश नाकाम, थानाध्यक्ष आलोक कुमार की सख़्ती से तस्कर सलाखों के पीछे; दो टूक चेतावनी कितना भी बड़ा रसूखदार हो, शराब बेचेगा तो जेल जाएगा.....
कोहरे की आड़ में पुआल के नीचे छिपाई गई थी नए साल की नशे की साज़िश, लेकिन कानून की आंखें जागती रहीं घनश्यामपुर में 1260 बोतल नेपाली शराब जब्त, फरारी की कोशिश नाकाम, थानाध्यक्ष आलोक कुमार की सख़्ती से तस्कर सलाखों के पीछे; दो टूक चेतावनी कितना भी बड़ा रसूखदार हो, शराब बेचेगा तो जेल जाएगा...... फोटो: मिथिला जन जन की आवाज समाचार

दरभंगा जिले के घनश्यामपुर थाना क्षेत्र में सोमवार की देर रात जो कुछ हुआ, वह महज़ एक बरामदगी नहीं थी यह शराब माफिया के विरुद्ध खुले युद्ध का ऐलान था।कोहरे की चादर ओढ़े अपराधियों ने सोचा था कि पुआल के नीचे छिपाई गई नेपाली शराब की यह खेप नए साल में ज़हर बनकर बिकेगी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि कानून की आंखें आज भी जाग रही हैं और उन आंखों का नाम है थानाध्यक्ष आलोक कुमार।

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पुआल के नीचे छिपा था अवैध साम्राज्य: घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के बसोली और गनौन के बीच स्थित खोड़ा गाछी में पुआल के ढेर के नीचे 1260 बोतल नेपाली शराब छिपाकर रखी गई थी। कुल मात्रा 378 लीटर, मतलब सैकड़ों घरों में बर्बादी पहुँचाने की पूरी तैयारी। गुप्त सूचना के आधार पर जब पुलिस टीम ने छापेमारी की, तो पहली नज़र में सब कुछ शांत लगा लेकिन जब पुआल हटाया गया, तो अवैध धंधे का असली चेहरा सामने था।

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पहले फरारी, फिर गिरफ्त में अपराध: प्रारंभिक रिपोर्टों में यह जरूर कहा गया कि कोहरे का फायदा उठाकर तस्कर फरार हो गया, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जब इस मामले में थानाध्यक्ष आलोक कुमार से दूरभाष पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया कि आरोपी को आज गिरफ्तार कर लिया गया है और जेल भेज दिया गया है। शराब तस्करी करने वाला चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो उसे जेल जाना ही होगा।घनश्यामपुर थाना में न कोई पेरवी चलती है, न किसी का रसूख। यह बयान नहीं, शराब माफिया के लिए सीधी चेतावनी है।

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आलोक कुमार: नाम नहीं, नीति है: घनश्यामपुर थाना क्षेत्र में आलोक कुमार की पहचान अब केवल एक पुलिस अधिकारी की नहीं रह गई है वे कानून के उस चेहरे का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो न झुकता है, न बिकता है, न डरता है। जहाँ अक्सर थानों पर पेरवी, दबाव और लेन-देन के आरोप लगते रहे हैं, वहीं आलोक कुमार का स्पष्ट संदेश है अपराधी अपराध करेगा, और पुलिस उसे सलाखों के पीछे भेजेगी बस, यहीं तक कहानी है।

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नए साल से पहले माफिया की कमर तोड़ी: प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह शराब नए साल के जश्न में खपाने की तैयारी थी। मतलब नशे के नाम पर घरों की शांति, युवाओं का भविष्य, और समाज की नींव हिलाने की साजिश। लेकिन उससे पहले ही घनश्यामपुर पुलिस ने माफिया की कमर तोड़ दी। यह कार्रवाई सिर्फ एक थाना क्षेत्र की नहीं यह सवाल है पूरे तंत्र से क्या हर थाना ऐसे ही सक्रिय होगा? क्या हर थानाध्यक्ष आलोक कुमार की तरह बेखौफ होगा? क्या शराबबंदी सिर्फ कागज़ों में नहीं, ज़मीन पर भी दिखेगी? घनश्यामपुर की यह कार्रवाई कम से कम यह उम्मीद जरूर जगाती है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो कानून आज भी अपराध से भारी पड़ सकता है।