बिजली गई और घर में उतर आया मौत का सन्नाटा! सिंहवाड़ा के भरवाड़ा में कमरे में सो रही 45 वर्षीय महिला को सांप ने डसा, बेटे ने पास में देखा जहरीला नाग, बचाने की हर कोशिश हुई नाकाम; मुजफ्फरपुर पहुंचने से पहले मौत, बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश...आखिर रात में शिकायत सुनने वाला कौन?
सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के नगर पंचायत भरवाड़ा के वार्ड संख्या-9 में बुधवार की दोपहर घटी एक दर्दनाक घटना ने बिजली व्यवस्था को लेकर पहले से नाराज लोगों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 वर्षीय मुन्नी देवी, पत्नी अनिल झा, की सर्पदंश से मौत हो गई। घटना उस वक्त हुई, जब वह अपने पुत्र निर्भय झा के साथ कमरे में सो रही थीं और अचानक बिजली चली गई. पढ़े पूरी खबर.....
दरभंगा। सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के नगर पंचायत भरवाड़ा के वार्ड संख्या-9 में बुधवार की दोपहर घटी एक दर्दनाक घटना ने बिजली व्यवस्था को लेकर पहले से नाराज लोगों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 वर्षीय मुन्नी देवी, पत्नी अनिल झा, की सर्पदंश से मौत हो गई। घटना उस वक्त हुई, जब वह अपने पुत्र निर्भय झा के साथ कमरे में सो रही थीं और अचानक बिजली चली गई।

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यह केवल सर्पदंश से हुई एक मौत की कहानी नहीं है। यह उस भयावह परिस्थिति की तस्वीर भी सामने लाती है, जिसमें उमस और गर्मी के बीच बिजली कटौती के कारण लोग घरों के भीतर अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। इसी अंधेरे में एक जहरीला सांप कमरे में पहुंचा और परिवार को संभलने तक का अवसर नहीं मिला। मुन्नी देवी को जब किसी चीज के काटने का एहसास हुआ और उनकी नींद खुली, तब उनके पुत्र निर्भय झा ने पास में सांप को देखा। शोर मचते ही परिवार में अफरा-तफरी मच गई। सर्पदंश की जानकारी मिलते ही स्वजन ने स्थानीय स्तर पर इलाज की व्यवस्था करने की कोशिश की, लेकिन महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

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स्थिति गंभीर होने पर परिजन उन्हें इलाज के लिए मुजफ्फरपुर लेकर रवाना हुए। परिवार की उम्मीद थी कि अस्पताल पहुंचते ही इलाज मिलेगा और मुन्नी देवी की जान बच जाएगी। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी सांसें थम गईं। देर रात जब उनका शव घर पहुंचा तो वहां का दृश्य हृदयविदारक था। जिस घर में कुछ घंटे पहले सामान्य दिनचर्या चल रही थी, उसी घर में मातम पसरा था। परिजनों की चीख-पुकार और रोने की आवाज से पूरा माहौल गमगीन हो गया। पति अनिल झा और दोनों पुत्र निर्भय झा एवं मनोहर झा के सामने अब घर की वह महिला नहीं थी, जो परिवार को अपने स्नेह से बांधे रखती थी। उनकी पुत्री विवाहित हैं और वर्तमान में मुंबई में रहती हैं। घटना की खबर परिवार और आसपास के लोगों के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं रही। ग्रामीणों ने घर पहुंचकर शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।

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गर्मी, अंधेरा और बढ़ता डर: दरभंगा और आसपास के इलाकों में पिछले कई दिनों से गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है। दिन के समय तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसी स्थिति में बिजली की निर्बाध आपूर्ति लोगों के लिए केवल सुविधा नहीं, बल्कि राहत का एक महत्वपूर्ण साधन बन जाती है। लेकिन ग्रामीण और शहरी इलाकों से लगातार बिजली कटौती को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि दिन हो या रात, बिजली के आने-जाने का कोई भरोसा नहीं रह गया है। रात में लंबे समय तक बिजली गायब रहने के कारण घरों में अंधेरा छा जाता है। ऐसे में गर्मी, मच्छर और जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा लोगों की चिंता और बढ़ा देता है। हालांकि यह कहना उचित नहीं होगा कि मुन्नी देवी की मौत का प्रत्यक्ष कारण बिजली कटौती ही थी। उनकी मौत का तत्काल कारण सर्पदंश था। लेकिन घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि अगर ग्रामीण इलाकों में रात के समय बिजली व्यवस्था इतनी कमजोर रहेगी, तो सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों से सुरक्षा को लेकर आम परिवार कितने असहाय रहेंगे?

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शिकायत करने के लिए फोन भी नहीं उठता: स्थानीय लोगों की शिकायत इससे भी गंभीर है। लोगों का कहना है कि रात के समय बिजली गुल होने पर जब वे बिजली विभाग के कर्मियों को फोन करते हैं तो कई बार फोन नहीं उठाया जाता। कुछ लोगों का आरोप है कि संबंधित अवर अभियंता से भी संपर्क करने में परेशानी होती है। अगर यह स्थिति वास्तव में बनी हुई है, तो यह केवल बिजली आपूर्ति का सवाल नहीं है, बल्कि जवाबदेही और आपातकालीन सेवा-प्रतिक्रिया का भी प्रश्न है। बिजली विभाग के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी इलाके में अचानक बिजली गुल होती है और सैकड़ों उपभोक्ता शिकायत करते हैं, तब शिकायतों के समाधान की निगरानी कौन करता है? रात में फॉल्ट होने पर जिम्मेदार कर्मी कौन है? उपभोक्ता किस अधिकारी से संपर्क करे? और अगर शिकायत के बावजूद बिजली बहाल नहीं होती, तो इसकी जवाबदेही किसकी तय होती है?

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सोशल मीडिया पर भी फूट रहा लोगों का आक्रोश: बिजली कटौती को लेकर लोगों का आक्रोश अब केवल मोहल्लों और चौपालों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी लोग बिजली व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। लोगों की शिकायत है कि बिजली की समस्या के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने और त्वरित समाधान की व्यवस्था भी मजबूत नहीं है। लोगों का सवाल सीधा है...जब गर्मी में बिजली की जरूरत सबसे ज्यादा है, तब आपूर्ति व्यवस्था कमजोर क्यों पड़ रही है? और अगर रात में फॉल्ट होता है तो उपभोक्ता अपनी शिकायत लेकर आखिर जाए कहां? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिजली कटौती का असर केवल पंखे और बल्ब बंद होने तक सीमित नहीं रहता। अंधेरे में बुजुर्गों, बच्चों और ग्रामीण परिवारों के सामने कई तरह के जोखिम बढ़ जाते हैं। घरों के आसपास सांप-बिच्छू जैसे जीवों की मौजूदगी ऐसे मौसम में अतिरिक्त खतरा बन सकती है। मुन्नी देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है। लेकिन उनकी मौत के बाद उठे सवालों को केवल एक दुखद घटना मानकर भुला देना शायद उचित नहीं होगा। एक परिवार ने अपना सदस्य खोया है। एक पति ने पत्नी खोई है। दो बेटों ने मां खोई है। एक बेटी ने अपनी मां को हमेशा के लिए खो दिया।

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इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यही है कि परिवार शायद अब भी उस क्षण को याद कर रहा होगा....जब बिजली चली गई, कमरे में अंधेरा हुआ, मुन्नी देवी को अचानक कुछ काटने का एहसास हुआ और कुछ ही देर में एक सामान्य दोपहर मातम में बदल गई। ऐसी घटनाओं को केवल संयोग कहकर छोड़ देना आसान है। लेकिन प्रशासन और बिजली विभाग के लिए यह घटना एक चेतावनी भी है कि बिजली आपूर्ति और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए। बिजली विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भरवाड़ा समेत संबंधित क्षेत्र में पिछले दिनों बिजली आपूर्ति की वास्तविक स्थिति क्या रही है। रात के समय कितनी देर तक बिजली बाधित हुई? फॉल्ट की शिकायत मिलने पर कितने समय में टीम पहुंचती है? क्या रात के समय शिकायतों के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध रहते हैं? क्या उपभोक्ताओं द्वारा बताए गए संपर्क नंबरों पर अधिकारी और कर्मी वास्तव में उपलब्ध रहते हैं? अगर व्यवस्था दुरुस्त है तो विभाग को आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि कहीं कमी है, तो उसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।

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क्योंकि बिजली महज रोशनी नहीं है। यह आज की जिंदगी की बुनियादी जरूरत है। और जब बिजली व्यवस्था चरमराती है, तो उसका असर घर की चारदीवारी से निकलकर सुरक्षा, स्वास्थ्य और जनजीवन तक पहुंचता है। मुन्नी देवी की मौत को लेकर किसी विभाग पर सीधे तौर पर दोषारोपण करना उचित नहीं होगा। लेकिन इस घटना से सामने आए सवालों को नजरअंदाज करना भी उतना ही अनुचित होगा। आज एक घर में अंधेरा है। उस अंधेरे को बिजली विभाग शायद कुछ घंटों में रोशनी से दूर कर सकता है। लेकिन मुन्नी देवी के परिवार के जीवन में जो अंधेरा उतर गया है, उसे कोई बिजली वापस नहीं ला सकती। यही इस घटना का सबसे भयावह सच है...एक जहरीले सांप ने डसा, लेकिन इस मौत ने बिजली व्यवस्था की उन कमजोरियों पर भी रोशनी डाल दी है, जिन्हें अब अनदेखा करना शायद भारी पड़ सकता है।
