बहेड़ी थाना परिसर में आखिर ऐसा क्या हुआ कि थानाध्यक्ष के कार्यालय तक पहुंच गया कथित बवाल? एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की कथित धमकी, सरकारी कार्य में बाधा, धक्का-मुक्की और हंगामे के आरोपों के बीच जानिए कौन है वह शख्स, कैसे देखते-देखते थाने का माहौल हुआ तनावपूर्ण, और प्राथमिकी में क्या-क्या लगाए गए हैं गंभीर आरोप?
दरभंगा जिले के बहेड़ी थाना परिसर में 14 जून की शाम घटी एक कथित घटना ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर कर रख दिया है। जिस कार्यालय से कानून की आवाज निकलती है, जहां से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की रणनीति बनती है, वहीं कार्यालय के भीतर कथित रूप से हुए हंगामे, धमकी, धक्का-मुक्की और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोपों ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। थानाध्यक्ष सूरज कुमार गुप्ता द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, बघौनी गांव निवासी कुमुद रंजन उर्फ कुमुद राम जबरन थानाध्यक्ष के कार्यालय में प्रवेश कर गया और वहां कथित रूप से अपनी जाति का हवाला देते हुए एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी देने लगा. पढ़े पूरी खबर....
बहेड़ी। दरभंगा जिले के बहेड़ी थाना परिसर में 14 जून की शाम घटी एक कथित घटना ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर कर रख दिया है। जिस कार्यालय से कानून की आवाज निकलती है, जहां से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की रणनीति बनती है, वहीं कार्यालय के भीतर कथित रूप से हुए हंगामे, धमकी, धक्का-मुक्की और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोपों ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। थानाध्यक्ष सूरज कुमार गुप्ता द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, बघौनी गांव निवासी कुमुद रंजन उर्फ कुमुद राम जबरन थानाध्यक्ष के कार्यालय में प्रवेश कर गया और वहां कथित रूप से अपनी जाति का हवाला देते हुए एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी देने लगा। आरोप है कि उसने सरकारी कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया और कार्यालय का वातावरण तनावपूर्ण बना दिया। जब कानून के प्रहरी के कार्यालय में ही बढ़ गया तनाव: प्राथमिकी में दर्ज आरोपों के अनुसार, पुलिस की छवि धूमिल करने वाले एक कथित अश्लील वीडियो के संबंध में जानकारी लेने पर संबंधित व्यक्ति आक्रोशित हो गया। देखते ही देखते कार्यालय का माहौल सामान्य प्रशासनिक वातावरण से निकलकर कथित टकराव की स्थिति में बदल गया। बताया गया है कि पहले तीखी बहस हुई, फिर कथित रूप से गाली-गलौज शुरू हुई और मामला इतना बढ़ गया कि थाने का वातावरण भय, तनाव और अफरातफरी से भर गया। प्राथमिकी के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर कुमुद रंजन ने अपने भाई प्रिय रंजन राम तथा पिता महेंद्र राम को भी थाना परिसर बुला लिया। आरोप है कि तीनों ने मिलकर पुलिस पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा समझाने के प्रयासों को अनसुना कर दिया।थानाध्यक्ष का आरोप है कि तीनों व्यक्तियों का व्यवहार लगातार उग्र होता गया और कार्यालय का अनुशासन पूरी तरह प्रभावित हो गया।

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सरकारी कागजात फेंकने और धक्का-मुक्की का गंभीर आरोप: एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित रूप से कार्यालय में रखे सरकारी दस्तावेजों को फेंक दिया गया तथा पुलिस अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई। यदि जांच में ऐसे आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि सरकारी कार्य में बाधा और प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने जैसा गंभीर मामला माना जा सकता है। प्रत्यक्षदर्शी पुलिसकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, जिसके बाद माहौल धीरे-धीरे सामान्य हुआ। हालांकि आरोपितों के वहां से चले जाने के बाद पूरे थाना परिसर में लंबे समय तक तनाव की स्थिति बनी रही। थानाध्यक्ष ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया है कि संबंधित आरोपितों के विरुद्ध पूर्व में भी पुलिस पदाधिकारियों के साथ अमर्यादित व्यवहार और दुर्व्यवहार के कई मामले दर्ज हैं। हालांकि इन मामलों की अंतिम न्यायिक स्थिति का उल्लेख प्राथमिकी में नहीं किया गया है।

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गिरफ्तारी के लिए छापेमारी, संभावित ठिकानों पर दबिश: पुलिस ने तीनों आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाएगी तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह घटना केवल एक प्राथमिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर भी विमर्श खड़ा करती है जहां कानून लागू कराने वाले संस्थान के भीतर ही कथित रूप से टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। यदि सार्वजनिक संस्थानों में संवाद की जगह आक्रोश और टकराव ले ले, तो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इस पूरे घटनाक्रम में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि थानाध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपित पक्ष का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है और मामला जांचाधीन है। इसलिए सभी आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक तथ्यों की पुष्टि होगी। फिलहाल बहेड़ी थाना परिसर में हुई इस कथित घटना ने स्थानीय प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच गहरी चर्चा छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें जांच की दिशा, साक्ष्यों और आगामी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।
