प्यारे बच्चों, क्या आपने अपना बस्ता तैयार कर लिया? क्या कॉपियों पर फिर से नाम लिख लिया? क्योंकि ग्रीष्मावकाश के बाद फिर से खुलने जा रहे हैं आपके स्कूल; लेकिन इस बार भीषण गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए बदला रहेगा विद्यालय का समय, जानिए किस दिन से शुरू होगी पढ़ाई, कितने बजे लगेगी कक्षा और कब होगी छुट्टी।

लगभग एक महीने तक स्कूलों के आंगन में पसरा सन्नाटा अब टूटने वाला है। बंद पड़े कक्षाओं के दरवाजे फिर खुलेंगे, ब्लैकबोर्ड पर फिर चॉक की खड़खड़ाहट सुनाई देगी, बच्चों की किलकारियां फिर विद्यालय परिसर में गूंजेंगी और शिक्षकों की आवाज़ें फिर से ज्ञान के दीप प्रज्वलित करती नजर आएंगी। लेकिन इस बार विद्यालयों की वापसी केवल पढ़ाई की वापसी नहीं है, बल्कि यह तपती धूप, झुलसाती हवाओं और बच्चों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की एक बड़ी चुनौती भी है। सोमवार से बिहार के करीब 80 हजार सरकारी विद्यालयों में पुनः शैक्षणिक गतिविधियां आरंभ होने जा रही हैं। ग्रीष्मावकाश की समाप्ति के बाद विद्यालयों का संचालन शुरू तो होगा, लेकिन सामान्य दिनों की तरह नहीं... पढ़े पूरी खबर....

प्यारे बच्चों, क्या आपने अपना बस्ता तैयार कर लिया? क्या कॉपियों पर फिर से नाम लिख लिया? क्योंकि ग्रीष्मावकाश के बाद फिर से खुलने जा रहे हैं आपके स्कूल; लेकिन इस बार भीषण गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए बदला रहेगा विद्यालय का समय, जानिए किस दिन से शुरू होगी पढ़ाई, कितने बजे लगेगी कक्षा और कब होगी छुट्टी।
प्यारे बच्चों, क्या आपने अपना बस्ता तैयार कर लिया? क्या कॉपियों पर फिर से नाम लिख लिया? क्योंकि ग्रीष्मावकाश के बाद फिर से खुलने जा रहे हैं आपके स्कूल; लेकिन इस बार भीषण गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए बदला रहेगा विद्यालय का समय, जानिए किस दिन से शुरू होगी पढ़ाई, कितने बजे लगेगी कक्षा और कब होगी छुट्टी।

पटना। लगभग एक महीने तक स्कूलों के आंगन में पसरा सन्नाटा अब टूटने वाला है। बंद पड़े कक्षाओं के दरवाजे फिर खुलेंगे, ब्लैकबोर्ड पर फिर चॉक की खड़खड़ाहट सुनाई देगी, बच्चों की किलकारियां फिर विद्यालय परिसर में गूंजेंगी और शिक्षकों की आवाज़ें फिर से ज्ञान के दीप प्रज्वलित करती नजर आएंगी। लेकिन इस बार विद्यालयों की वापसी केवल पढ़ाई की वापसी नहीं है, बल्कि यह तपती धूप, झुलसाती हवाओं और बच्चों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की एक बड़ी चुनौती भी है। सोमवार से बिहार के करीब 80 हजार सरकारी विद्यालयों में पुनः शैक्षणिक गतिविधियां आरंभ होने जा रही हैं। ग्रीष्मावकाश की समाप्ति के बाद विद्यालयों का संचालन शुरू तो होगा, लेकिन सामान्य दिनों की तरह नहीं। आसमान से बरसती आग और धरती पर बहती लू की भयावह परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने विशेष समय-सारिणी को 30 जून तक बढ़ा दिया है। यानी विद्यालयों की घंटी अब सुबह की ठंडी हवा के साथ बजेगी और दोपहर की तपिश बढ़ने से पहले बच्चों को घर वापस भेज दिया जाएगा।

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जब सूरज बन गया चुनौती, तब शिक्षा विभाग ने बदला समय: बिहार में इस वर्ष गर्मी ने अपने तेवर कुछ ऐसे दिखाए हैं कि सुबह के आठ बजे के बाद ही सड़कें तवे की तरह तपने लगती हैं। दोपहर तक स्थिति इतनी विकराल हो जाती है कि घर से बाहर निकलना तक जोखिम भरा प्रतीत होता है। ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ा प्रश्न था.... क्या बच्चों को इस भीषण गर्मी में सामान्य समय पर विद्यालय बुलाया जाए. लंबे विचार-विमर्श और मौसम की गंभीरता का आकलन करने के बाद विभाग ने यह निर्णय लिया कि विद्यालयों का संचालन अभी पूर्व निर्धारित विशेष समय-सारिणी के अनुसार ही किया जाएगा। इस निर्णय के तहत राज्य के सभी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक संचालित होंगे। यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि लाखों बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया एक एहतियाती कदम माना जा रहा है। सोचिए वह सुबह... कल्पना कीजिए सूरज अभी पूरी तरह निकला भी नहीं है। गांव की गलियों में साइकिलों की घंटियां बज रही हैं। कंधे पर बस्ता टांगे बच्चे तेज कदमों से विद्यालय की ओर बढ़ रहे हैं। किसी के हाथ में पानी की बोतल है, किसी की जेब में टिफिन रखा है। विद्यालय के मुख्य द्वार पर शिक्षक मुस्कुराकर बच्चों का स्वागत कर रहे हैं।प्रार्थना सभा में कतारबद्ध छात्र-छात्राएं खड़े हैं। हम होंगे कामयाब... की सामूहिक स्वर-लहरियां वातावरण को जीवंत बना रही हैं। कई सप्ताह के अवकाश के बाद यह दृश्य फिर लौटेगा। लेकिन इस खुशी के बीच गर्मी का खतरा भी छाया रहेगा।

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लू की लपटें और बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी परीक्षा: विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। अत्यधिक तापमान में निर्जलीकरण, चक्कर, थकावट, सिरदर्द और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालय प्रधानों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जहां संभव हो वहां बच्चों को छायादार स्थानों पर बैठाया जाए। खेलकूद और अनावश्यक बाहरी गतिविधियों को सीमित रखा जाए। बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाए। क्योंकि शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण से भी संचालित होती है।

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मध्याह्न भोजन की भी होगी विशेष व्यवस्था: बिहार के कई विद्यालय ऐसे हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या इतनी अधिक है कि एक साथ सभी बच्चों को मध्याह्न भोजन कराना कठिन हो जाता है। ऐसे विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। वे आवश्यकता के अनुसार बच्चों को विभिन्न समूहों में विभाजित कर सकते हैं। पहले एक समूह भोजन करेगा, फिर दूसरा। इसी प्रकार पठन-पाठन की व्यवस्था भी चरणबद्ध तरीके से संचालित की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि बच्चों को भीड़, अव्यवस्था और गर्मी के अतिरिक्त प्रभाव से बचाना भी है। अभिभावकों की चिंता भी कम नहीं... हर वर्ष गर्मी बढ़ते ही अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ जाती हैं। कई माता-पिता सुबह विद्यालय भेजते समय बार-बार यही हिदायत देते हैं.... पानी पीते रहना। धूप में मत दौड़ना। किसी परेशानी हो तो तुरंत शिक्षक को बताना। इस बार भी विद्यालय खुलने की खुशी के साथ-साथ अभिभावकों की नजर मौसम पर टिकी हुई है। क्योंकि शिक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण बच्चों का जीवन और स्वास्थ्य है।

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जिला शिक्षा पदाधिकारियों को मिले विशेष अधिकार: शिक्षा विभाग ने परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भी आवश्यक अधिकार प्रदान किए हैं। यदि किसी जिले में तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है या मौसम अत्यधिक प्रतिकूल हो जाता है, तो स्थानीय स्तर पर विद्यालय संचालन में आवश्यक संशोधन किया जा सकता है। यह व्यवस्था इस बात का संकेत है कि विभाग केवल एक समान आदेश जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी देना चाहता है। फिलहाल विशेष समय-सारिणी 30 जून तक लागू रहेगी। इसके बाद यदि मौसम सामान्य रहता है और परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो विद्यालय पुनः अपनी पारंपरिक समय-सारिणी पर लौट आएंगे। तब कक्षाएं सुबह 9:30 बजे से अपराह्न 4 बजे तक संचालित होंगी। लेकिन फिलहाल बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को इस विशेष व्यवस्था के साथ ही आगे बढ़ना होगा। विद्यालयों के खुलने की खबर केवल एक प्रशासनिक सूचना नहीं है। यह उन सपनों की वापसी है जो गर्मी की छुट्टियों में थोड़ी देर के लिए ठहर गए थे।यह उन बच्चों की वापसी है जिनकी आंखों में डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वैज्ञानिक और अधिकारी बनने के सपने पल रहे हैं। यह उन शिक्षकों की वापसी है जो ज्ञान के दीपक जलाकर आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। और यह उन अभिभावकों की उम्मीदों की वापसी है जो अपने बच्चों को अपने से बेहतर भविष्य में देखना चाहते हैं। सोमवार की सुबह जब विद्यालय की घंटी बजेगी, तब केवल कक्षाएं नहीं खुलेंगी, बल्कि लाखों सपनों के द्वार भी पुनः खुलेंगे। लेकिन इन सपनों की रक्षा के लिए सावधानी भी उतनी ही आवश्यक है। भीषण गर्मी और लू के इस दौर में शिक्षा और सुरक्षा... दोनों का संतुलन ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। क्योंकि बच्चों की मुस्कान सुरक्षित रहेगी, तभी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य भी सुरक्षित रहेगा।