ड्रीम-11 के शौकीनों के लिए खतरे की घंटी! ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में चल रहा था हथियार और साइबर ठगी का खौफनाक नेटवर्क, घनश्यामपुर पुलिस के ‘नाइट अटैक’ में पिस्टल-कारतूस के साथ खुला पूरा काला सच थानाध्यक्ष आलोक कुमार के आते ही अपराधियों में मची भगदड़, बदमाश और तस्कर इलाका छोड़ने को मजबूर.....
दरभंगा जिले के घनश्यामपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार की रात पुलिसिया कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अगर थाने की कमान अनुभवी, सजग और निर्भीक हाथों में हो, तो अपराध कितनी भी गहराई में छिपा हो वह बच नहीं सकता। अवैध हथियार और ऑनलाइन ठगी जैसे संगठित अपराध के जाल पर घनश्यामपुर थाना पुलिस ने ऐसा करारा वार किया, जिसने न सिर्फ अपराधियों की नींद उड़ा दी, बल्कि पूरे इलाके में कानून के डर की एक नई लकीर खींच दी. आगे पढ़े.......
दरभंगा जिले के घनश्यामपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार की रात पुलिसिया कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अगर थाने की कमान अनुभवी, सजग और निर्भीक हाथों में हो, तो अपराध कितनी भी गहराई में छिपा हो वह बच नहीं सकता। अवैध हथियार और ऑनलाइन ठगी जैसे संगठित अपराध के जाल पर घनश्यामपुर थाना पुलिस ने ऐसा करारा वार किया, जिसने न सिर्फ अपराधियों की नींद उड़ा दी, बल्कि पूरे इलाके में कानून के डर की एक नई लकीर खींच दी।

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रात के सन्नाटे में पुलिस का शिकंजा: शुक्रवार देर रात, जब गांवों की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था, उसी समय थानाध्यक्ष आलोक कुमार के नेतृत्व में घनश्यामपुर थाना पुलिस सशस्त्र बल के साथ रात्रि गश्ती और वाहन जांच में जुटी थी। तभी गुप्त सूचना ने पुलिस को चौंका दिया थाना क्षेत्र के मुंगरा गांव में एक युवक अपने घर में अवैध हथियार छिपाकर न सिर्फ कानून को चुनौती दे रहा है, बल्कि वहीं से ऑनलाइन फ्रॉड का काला धंधा भी संचालित कर रहा है। सूचना गंभीर थी, खतरा बड़ा था, और चुनौती सीधी लेकिन पुलिस ने एक पल की देरी नहीं की।

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मुंगरा गांव में छापेमारी, बक्से से निकला खौफ: सूचना के सत्यापन के बाद थानाध्यक्ष आलोक कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मुंगरा गांव स्थित गोविंद मुखिया के घर पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान घर के अंदर एक बक्से में छिपाकर रखी गई एक देसी पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए। यह सिर्फ हथियार की बरामदगी नहीं थी, बल्कि उस डर की झलक थी, जिसके सहारे अपराधी अपने नेटवर्क को जिंदा रखते हैं। पुलिस ने मौके से गोविंद मुखिया के पुत्र श्रीकांत मुखिया को गिरफ्तार किया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई यहीं से खुलने लगा एक संगठित साइबर अपराध का अंधेरा अध्याय। ऑनलाइन फ्रॉड का पूरा ‘डिजिटल अड्डा’ उजागर

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गिरफ्तार युवक के कब्जे से जो सामान बरामद हुआ, उसने पुलिस को भी चौंका दिया। तलाशी में मिले चार एटीएम कार्ड, पांच सिम कार्ड, दो बैंक पासबुक, चार बैंक चेकबुक, दो लैपटॉप, दो मोबाइल फोन... पुलिस के अनुसार, बरामद पासबुक और चेकबुक कर्नाटक के विभिन्न बैंकों से संबंधित हैं, जो इस बात की ओर साफ इशारा करते हैं कि ठगी का नेटवर्क राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैला हुआ है।

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भोपाल से चलता था ठगी का ‘कंट्रोल रूम’: जांच में यह भी सामने आया है कि इस ऑनलाइन फ्रॉड गिरोह का मुख्य सरगना भोपाल से पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। यह गिरोह खासतौर पर ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, विशेषकर ड्रीम 11 को निशाना बनाता था। आरोप है कि गेम में पैसा लगाने वाले लोगों के खातों से अवैध तरीके से राशि काटकर उसे अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था और पीड़ित तब तक कुछ समझ पाते, उससे पहले पैसा उड़ चुका होता।

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कई दिनों से तलाश में थी पुलिस: थानाध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि पुलिस को इस गिरोह की तलाश लंबे समय से थी, लेकिन सटीक लोकेशन हाथ नहीं लग पा रही थी। गुप्त सूचना के आधार पर आखिरकार इस नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ के बाद संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि वह किन-किन ऑनलाइन ठगी और अन्य आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरे कौन हैं।

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एसडीपीओ का स्पष्ट संदेश अब कोई नहीं बचेगा: एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की गई थी। इस दौरान एक पिस्टल और दो जिंदा कारतूस के साथ-साथ ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े अहम साक्ष्य मिले हैं। प्राथमिक एफआईआर दर्ज कर ली गई है और सभी डिजिटल डाटा साइबर टीम को सौंप दिया गया है। तकनीकी जांच के बाद यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनकी गिरफ्तारी भी तय है।

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अलोक कुमार: नाम नहीं, खौफ बनता जा रहा है: घनश्यामपुर थाना क्षेत्र में यह कोई इत्तेफाक नहीं कि अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है। जब से थानाध्यक्ष आलोक कुमार ने घनश्यामपुर थाना की कमान संभाली है, तब से मानो शराब तस्कर हों या फिर बदमाश सब इलाके से भागने को मजबूर दिख रहे हैं। यह वही आलोक कुमार हैं, जो पहले भी इसी थाने में सहायक उप-निरीक्षक के पद पर तैनात रह चुके हैं, जब थानाध्यक्ष के रूप में अजित कुमार झा कार्यरत थे। बाद में अजित कुमार झा का स्थानांतरण हुआ और अब घनश्यामपुर थाना की जिम्मेदारी आलोक कुमार के कंधों पर है। युवा, ऊर्जावान और फील्ड का गहरा अनुभव रखने वाले आलोक कुमार की कार्यशैली साफ संदेश देती है कानून से खेलने वालों के लिए अब घनश्यामपुर सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहा।

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अपराधियों के लिए साफ चेतावनी: अवैध हथियार, साइबर ठगी और संगठित अपराध इन तीनों का खतरनाक संगम अगर किसी क्षेत्र में पनप जाए, तो समाज के लिए वह बारूद बन जाता है। घनश्यामपुर पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अपराधियों के लिए एक डरावनी चेतावनी है अब या तो कानून के रास्ते चलो, या फिर सलाखों के पीछे जाने को तैयार रहो। पुलिस पूरे मामले की हर परत खोलने में जुटी है, और संकेत साफ हैं घनश्यामपुर में अपराध का अंधेरा अब ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं।
