कक्षा छठी की एक छात्रा, दरभंगा का एक प्रसिद्ध स्कूल और दिल्ली का वह राष्ट्रीय मंच जहाँ हर वर्ष देश की श्रेष्ठ प्रतिभाएँ परखी जाती हैं… इस बार जब निर्णायकों की दृष्टि एक बिंदु पर ठहर गई, भीड़ में अचानक एक नाम की तलाश शुरू हुई और मिथिला से उठी साधना ने सर्वोच्च स्थान पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी.... आखिर कौन है वह बालिका, जिसकी उपलब्धि ने शहर की शैक्षणिक पहचान को नई ऊँचाई दी? पूरी रिपोर्ट पढ़े बिना यह सवाल अधूरा रहेगा....

शिक्षा के क्षेत्र में दरभंगा के लिए यह एक अत्यंत गर्व का विषय है कि दरभंगा जूनियर पब्लिक स्कूल, रामबाग की कक्षा छठी की छात्रा नैवेद्या शास्त्री ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। संस्कृत भाषा और प्राच्य विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए नैवेद्या ने अखिल भारतीय शलाका परीक्षा में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि विद्यालय, शहर और पूरे मिथिला क्षेत्र के लिए सम्मान का विषय है. पढ़े पूरी रिपोर्ट......

कक्षा छठी की एक छात्रा, दरभंगा का एक प्रसिद्ध स्कूल और दिल्ली का वह राष्ट्रीय मंच जहाँ हर वर्ष देश की श्रेष्ठ प्रतिभाएँ परखी जाती हैं… इस बार जब निर्णायकों की दृष्टि एक बिंदु पर ठहर गई, भीड़ में अचानक एक नाम की तलाश शुरू हुई और मिथिला से उठी साधना ने सर्वोच्च स्थान पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी.... आखिर कौन है वह बालिका, जिसकी उपलब्धि ने शहर की शैक्षणिक पहचान को नई ऊँचाई दी? पूरी रिपोर्ट पढ़े बिना यह सवाल अधूरा रहेगा....
कक्षा छठी की एक छात्रा, दरभंगा का एक प्रसिद्ध स्कूल और दिल्ली का वह राष्ट्रीय मंच जहाँ हर वर्ष देश की श्रेष्ठ प्रतिभाएँ परखी जाती हैं… इस बार जब निर्णायकों की दृष्टि एक बिंदु पर ठहर गई, भीड़ में अचानक एक नाम की तलाश शुरू हुई और मिथिला से उठी साधना ने सर्वोच्च स्थान पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी.... आखिर कौन है वह बालिका, जिसकी उपलब्धि ने शहर की शैक्षणिक पहचान को नई ऊँचाई दी? पूरी रिपोर्ट पढ़े बिना यह सवाल अधूरा रहेगा

दरभंगा। शिक्षा के क्षेत्र में दरभंगा के लिए यह एक अत्यंत गर्व का विषय है कि दरभंगा जूनियर पब्लिक स्कूल, रामबाग की कक्षा छठी की छात्रा नैवेद्या शास्त्री ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। संस्कृत भाषा और प्राच्य विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए नैवेद्या ने अखिल भारतीय शलाका परीक्षा में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि विद्यालय, शहर और पूरे मिथिला क्षेत्र के लिए सम्मान का विषय है।

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यह प्रतिष्ठित परीक्षा संस्कृत भारती उत्तर प्रदेश न्यास, वाराणसी द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। इस वर्ष कनिष्ठ संवर्ग की शलाका परीक्षा का आयोजन श्रीजयराम ब्रह्मचर्य आश्रम, नई दिल्ली में किया गया। परीक्षा में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 40 स्कूली बच्चों ने भाग लिया। विषय के विशेषज्ञों द्वारा किए गए मूल्यांकन में नैवेद्या शास्त्री को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया।

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नैवेद्या शास्त्री, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर व्याकरण विभाग में सहायक प्राचार्य डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री की पुत्री हैं। पारिवारिक वातावरण में संस्कृत अध्ययन की मजबूत परंपरा का प्रभाव उनके अध्ययन और रुचि में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। नैवेद्या ने इससे पहले भी स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कार प्राप्त किए हैं, जिससे उनकी निरंतर मेहनत और लगन प्रमाणित होती है। कनिष्ठ स्तर की इस शलाका परीक्षा में कक्षा सात तक के विद्यार्थियों को शामिल किया गया था। शीर्ष स्थान प्राप्त करने पर आयोजन समिति की ओर से नैवेद्या को गोल्ड मेडल, 20,000 रुपये की पुरस्कार राशि, चांदी की एक शलाका और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके अध्ययन, स्मरण शक्ति और विषय पर पकड़ का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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संस्कृत और प्राच्य विषयों के प्रति अपनी रुचि के बारे में नैवेद्या का कहना है कि संस्कृत का अध्ययन करने से उन्हें मानसिक शांति और स्वाभाविक आनंद की अनुभूति होती है। वेद, व्याकरण और अन्य प्राच्य शास्त्रों के कई श्लोक उन्हें कंठस्थ हैं, जो उनकी निरंतर अभ्यास की आदत को दर्शाता है। इतनी कम उम्र में इस स्तर की तैयारी और आत्मविश्वास उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करता है। इसके अतिरिक्त, अखिल भारतीय अमरकोश शलाका परीक्षा में भी प्रथम स्थान प्राप्त करने पर नैवेद्या और उनके पिता डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री को विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापकों और संस्कृत विद्वानों ने बधाई दी है। बधाई देने वालों में प्रो. दयानाथ झा, प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. पुरेन्द्र वारिक, डॉ. साधना शर्मा, डॉ. एल. सविता आर्या, डॉ. धीरज पांडेय, डॉ. शंभूशरण तिवारी, डॉ. रितेश चतुर्वेदी, डॉ. संतोष तिवारी, डॉ. संतोष पासवान सहित अन्य शिक्षक और संस्कृतज्ञ शामिल हैं।

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दरभंगा जूनियर पब्लिक स्कूल, रामबाग में इस उपलब्धि को लेकर हर्ष का माहौल है। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों का मानना है कि यह सफलता स्कूल में दिए जा रहे शैक्षणिक मार्गदर्शन, अनुशासन और विद्यार्थियों को मिलने वाले सकारात्मक वातावरण का परिणाम है। विद्यालय ने नैवेद्या की इस उपलब्धि को अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया है। कुल मिलाकर, नैवेद्या शास्त्री की यह सफलता यह दर्शाती है कि यदि सही मार्गदर्शन, पारिवारिक सहयोग और नियमित अध्ययन हो, तो पारंपरिक विषयों में भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है। दरभंगा जूनियर पब्लिक स्कूल, रामबाग की यह छात्रा आने वाले समय में संस्कृत और प्राच्य शिक्षा के क्षेत्र में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगी, ऐसी अपेक्षा की जा रही है।