रामबाग राज किला की शैक्षणिक धरोहर में फिर गूंजा स्वर्णिम उत्कर्ष का घोष: Darbhanga Junior Public School के परिणामों ने रचा इतिहास, 98.6% के शिखर पर विराजमान Prem Kumar ने उत्तर बिहार को किया गौरवान्वित.... परन्तु इस उजाले के पीछे छिपे हैं दो और अनकहे सितारे… जानिए कौन हैं वे तीन शिखर पुरुष जिन्होंने अंकों की सीमाओं को लांघते हुए दरभंगा की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, जहाँ परिश्रम बना पहचान और प्रतिभा ने लिख दी सफलता की अमिट गाथा

इतिहास केवल राजाओं, किलों और युद्धों से नहीं बनता कभी-कभी इतिहास उन कक्षाओं में भी जन्म लेता है, जहाँ चॉक की धूल के बीच सपनों को आकार दिया जाता है। रामबाग राज किला की पावन भूमि, जिसने कभी राजसी वैभव और सांस्कृतिक गौरव की गाथाएँ सुनी थीं, आज शिक्षा की उपलब्धियों के नए स्वर्णिम अध्याय की साक्षी बनी। जैसे ही आईसीएसई बोर्ड कक्षा 10वीं परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित हुए, उसी क्षण Darbhanga Junior Public School के प्रांगण में उल्लास, आत्मगौरव और उपलब्धि की एक अद्भुत तरंग दौड़ पड़ी। यह केवल एक परिणाम नहीं था..... यह उस निरंतर साधना का साकार रूप था, जिसमें वर्षों की मेहनत, शिक्षकों का समर्पण, अभिभावकों का विश्वास और विद्यार्थियों के अडिग संकल्प ने मिलकर सफलता की एक भव्य प्रतिमा गढ़ी. पढ़े पूरी रिपोर्ट.....

रामबाग राज किला की शैक्षणिक धरोहर में फिर गूंजा स्वर्णिम उत्कर्ष का घोष: Darbhanga Junior Public School के परिणामों ने रचा इतिहास, 98.6% के शिखर पर विराजमान Prem Kumar ने उत्तर बिहार को किया गौरवान्वित.... परन्तु इस उजाले के पीछे छिपे हैं दो और अनकहे सितारे… जानिए कौन हैं वे तीन शिखर पुरुष जिन्होंने अंकों की सीमाओं को लांघते हुए दरभंगा की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, जहाँ परिश्रम बना पहचान और प्रतिभा ने लिख दी सफलता की अमिट गाथा
रामबाग राज किला की शैक्षणिक धरोहर में फिर गूंजा स्वर्णिम उत्कर्ष का घोष: Darbhanga Junior Public School के परिणामों ने रचा इतिहास, 98.6% के शिखर पर विराजमान Prem Kumar ने उत्तर बिहार को किया गौरवान्वित.... परन्तु इस उजाले के पीछे छिपे हैं दो और अनकहे सितारे… जानिए कौन हैं वे तीन शिखर पुरुष जिन्होंने अंकों की सीमाओं को लांघते हुए दरभंगा की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, जहाँ परिश्रम बना पहचान और प्रतिभा ने लिख दी सफलता की अमिट गाथा

दरभंगा। इतिहास केवल राजाओं, किलों और युद्धों से नहीं बनता कभी-कभी इतिहास उन कक्षाओं में भी जन्म लेता है, जहाँ चॉक की धूल के बीच सपनों को आकार दिया जाता है। रामबाग राज किला की पावन भूमि, जिसने कभी राजसी वैभव और सांस्कृतिक गौरव की गाथाएँ सुनी थीं, आज शिक्षा की उपलब्धियों के नए स्वर्णिम अध्याय की साक्षी बनी। जैसे ही आईसीएसई बोर्ड कक्षा 10वीं परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित हुए, उसी क्षण Darbhanga Junior Public School के प्रांगण में उल्लास, आत्मगौरव और उपलब्धि की एक अद्भुत तरंग दौड़ पड़ी। यह केवल एक परिणाम नहीं था..... यह उस निरंतर साधना का साकार रूप था, जिसमें वर्षों की मेहनत, शिक्षकों का समर्पण, अभिभावकों का विश्वास और विद्यार्थियों के अडिग संकल्प ने मिलकर सफलता की एक भव्य प्रतिमा गढ़ी।

                                          Prem kumar

उत्तर बिहार में शीर्ष पर एक नाम....प्रेम कुमार: इस ऐतिहासिक उपलब्धि के केंद्र में रहे Prem Kumar, जिन्होंने 98.6 प्रतिशत अंक अर्जित कर न केवल विद्यालय बल्कि पूरे उत्तर बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त कर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। यह उपलब्धि केवल संख्याओं का खेल नहीं, बल्कि उस असाधारण मेधा, अनुशासन और लक्ष्यनिष्ठा का प्रमाण है, जो प्रेम कुमार के व्यक्तित्व में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। गणित, कंप्यूटर और सोशल साइंस जैसे विषयों में शत-प्रतिशत अंक (100%) प्राप्त कर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि जब प्रतिभा और परिश्रम एक साथ चलते हैं, तो असंभव शब्द केवल शब्दकोश में रह जाता है। उनके पिता मुकेश कुमार महतो एक व्यवसायी हैं, जबकि माता रेखा देवी गृहिणी हैं.... एक साधारण परिवार से निकलकर असाधारण उपलब्धि हासिल करने की यह कहानी उन लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं। प्रेम कुमार का लक्ष्य भी उतना ही ऊँचा है..... वे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाकर डेटा साइंस के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं और एक सफल आईआईटियन बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहते हैं।

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जिले के शीर्ष तीनों स्थानों पर विद्यालय का वर्चस्व: इस वर्ष का परिणाम केवल एक छात्र की सफलता तक सीमित नहीं रहा। दरभंगा जूनियर पब्लिक स्कूल ने दरभंगा जिले के शीर्ष तीनों स्थानों पर अपना कब्जा जमाकर एक ऐतिहासिक प्रभुत्व स्थापित किया। दूसरे स्थान पर रहे Abhishek Jha, जिन्होंने 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। उनकी माता शिखा कुमारी एक सरकारी शिक्षिका हैं और पिता मन्त्रनाथ झा सरकारी लाइब्रेरियन। अभिषेक की सफलता उनके अनुशासित अध्ययन और परिवार के शैक्षणिक वातावरण का परिणाम है। उनका सपना भी ऊँचा है..... वे भविष्य में एक सफल उद्यमी बनने के साथ-साथ उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। तीसरे स्थान पर रहीं Adya Shri, जिन्होंने 96.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का सशक्त परिचय दिया। उनके माता-पिता प्रियंका पाठक और विपिन उपाध्याय दोनों ही स्टेट बैंक में कार्यरत हैं। आद्या का दृष्टिकोण केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है; वे जीवन के हर क्षेत्र में दक्षता प्राप्त कर समाज सेवा के उद्देश्य से डॉक्टर बनना चाहती हैं।

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अन्य मेधावी विद्यार्थियों का उल्लेखनीय योगदान: इस गौरवपूर्ण परिणाम में अनेक अन्य विद्यार्थियों ने भी अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी। Pawan Kumar (94.6%), Pritha Chaudhary (94.4%), Sonali (92.4%), Shivam Jha (90.8%), Arsh Agrawal (90.6%), Prakshit Kumar (90.4%), Papala Sohan Kumar (89.4%), और Mohammad Asim (89.4%) इन सभी विद्यार्थियों ने विद्यालय की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह सूची केवल नामों की सूची नहीं है, बल्कि यह उस सामूहिक प्रयास की झलक है जिसमें हर विद्यार्थी ने अपने स्तर पर उत्कृष्टता की परिभाषा को पुनर्परिभाषित किया।

                                          Aadya shri

प्राचार्या का दृष्टिकोण सफलता के पीछे की संरचना: विद्यालय की प्राचार्या Shalini Kumari ने इस अवसर पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष का परिणाम विद्यालय के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने बताया कि हर पाँच में से एक विद्यार्थी ने 88 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि विद्यालय में शिक्षा केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुविचारित और सुदृढ़ प्रणाली के अंतर्गत दी जा रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह विद्यालय का केवल दूसरा आईसीएसई बैच था, और इतने कम समय में इस स्तर की उपलब्धि प्राप्त करना संस्थान की गुणवत्ता, अनुशासन और शिक्षण पद्धति की उत्कृष्टता को दर्शाता है।

                                        Abhishek jha 

निदेशक का संदेश अंकों से आगे की सफलता: विद्यालय के निदेशक Dr. Vishal Gaurav ने इस सफलता को केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित न मानते हुए इसे विद्यार्थियों के समग्र विकास का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि यह परिणाम इस बात का प्रमाण है कि जब शिक्षा को समर्पण, अनुशासन और दूरदृष्टि के साथ दिया जाए, तो वह केवल अंक नहीं देती.... वह व्यक्तित्व गढ़ती है, चरित्र निर्माण करती है और समाज को दिशा देती है।उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भी विद्यालय इसी प्रकार उत्कृष्टता की नई ऊँचाइयों को छुएगा।

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पिछले वर्षों की उपलब्धियों से आगे का कदम: यदि पिछले वर्षों के परिणामों पर दृष्टि डालें, तो स्पष्ट होता है कि दरभंगा जूनियर पब्लिक स्कूल निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर रहा है। प्रारंभिक बैच से लेकर अब तक, विद्यालय ने हर वर्ष अपने परिणामों में सुधार किया है....परंतु इस वर्ष का परिणाम उन सभी उपलब्धियों से एक कदम आगे जाकर एक नए मानक की स्थापना करता है। यह केवल वृद्धि नहीं, बल्कि एक गुणात्मक उत्कर्ष (Qualitative Leap) है, जिसने यह सिद्ध कर दिया है कि यह संस्थान आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की क्षमता रखता है।

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शिक्षा का वह वातावरण, जहाँ सपने आकार लेते हैं: रामबाग राज किला के ऐतिहासिक परिवेश में स्थित यह विद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा केंद्र बन चुका है जहाँ परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जाता, बल्कि उन्हें सोचने, समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी जाती है। अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन, अनुशासित दिनचर्या, और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित दृष्टिकोण....ये सभी तत्व मिलकर एक ऐसा वातावरण निर्मित करते हैं जहाँ सफलता केवल संभावना नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक परिणाम बन जाती है।

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आईसीएसई कक्षा 10वीं के इस वर्ष के परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि Darbhanga Junior Public School केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ शैक्षणिक संस्थान है जो आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करने की क्षमता रखता है। यह सफलता केवल कुछ विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि एक पूरे तंत्र की सफलता है.... जहाँ हर शिक्षक, हर अभिभावक और हर विद्यार्थी ने अपनी भूमिका को पूरी निष्ठा के साथ निभाया है। रामबाग की ऐतिहासिक दीवारों के बीच गूँजती यह सफलता की गाथा आने वाले वर्षों में अनगिनत विद्यार्थियों को प्रेरित करती रहेगी.... कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, प्रयास निरंतर हो और मार्गदर्शन सटीक हो, तो कोई भी शिखर दूर नहीं।