बीएलओ अशोक दास की आत्महत्या, वोट बैंक की राजनीति, मीडिया पर सत्ता के हमले और ममता बनर्जी के शासन में बंगाल से पंजाब तक लोकतंत्र के लगातार कमजोर होते ढांचे पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने ऐसे तीखे और असहज करने वाले सवाल उठाए, जिनसे सियासी गलियारों में हलचल मच गई। आगे पढ़िए…

भारतीय लोकतंत्र के सबसे संवेदनशील स्तंभ.....चुनाव प्रक्रिया और स्वतंत्र मीडिया आज सत्ता की राजनीति के सबसे बड़े शिकार बनते जा रहे हैं। यही आरोप बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने लगाते हुए पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर एक साथ तीखा, कठोर और चेतावनी भरा हमला बोला. पढ़े पूरी खबर....

बीएलओ अशोक दास की आत्महत्या, वोट बैंक की राजनीति, मीडिया पर सत्ता के हमले और ममता बनर्जी के शासन में बंगाल से पंजाब तक लोकतंत्र के लगातार कमजोर होते ढांचे पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने ऐसे तीखे और असहज करने वाले सवाल उठाए, जिनसे सियासी गलियारों में हलचल मच गई। आगे पढ़िए…
बीएलओ अशोक दास की आत्महत्या, वोट बैंक की राजनीति, मीडिया पर सत्ता के हमले और ममता बनर्जी के शासन में बंगाल से पंजाब तक लोकतंत्र के लगातार कमजोर होते ढांचे पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने ऐसे तीखे और असहज करने वाले सवाल उठाए, जिनसे सियासी गलियारों में हलचल मच गई। आगे पढ़िए…

पटना। भारतीय लोकतंत्र के सबसे संवेदनशील स्तंभ.....चुनाव प्रक्रिया और स्वतंत्र मीडिया आज सत्ता की राजनीति के सबसे बड़े शिकार बनते जा रहे हैं। यही आरोप बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने लगाते हुए पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर एक साथ तीखा, कठोर और चेतावनी भरा हमला बोला।

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सरावगी के शब्दों में पश्चिम बंगाल अब वह ‘शोनार बांग्ला’ नहीं रहा, जिसकी पहचान कभी सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिक विमर्श और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से होती थी। आज वही धरती भय, हिंसा और सत्ता-प्रायोजित अराजकता का पर्याय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अब किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं, बल्कि तुष्टिकरण, माफियागिरी और संगठित अपराध की कार्यशैली का संक्षिप्त रूप बन चुकी है।

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जब चुनाव ड्यूटी बन जाए मौत का खतरा: भाजपा अध्यक्ष ने जादवपुर विधानसभा क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर अशोक दास की आत्महत्या को केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्महत्या करार दिया। उनका कहना था कि एक ईमानदार चुनाव कर्मी पर अवैध वोटरों के नाम सूची से हटाने को लेकर जिस तरह का दबाव, धमकी और मानसिक उत्पीड़न बनाया गया, उसने पूरे चुनावी तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के लिए काम करना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है? क्या सरकारी कर्मचारी को सिर्फ इसलिए अपनी जान देनी पड़े, क्योंकि उसने संविधान के प्रति निष्ठा दिखाई?

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सरावगी ने आरोप लगाया कि अशोक दास को न केवल व्यक्तिगत रूप से डराया गया, बल्कि उनके परिवार..... पत्नी और मासूम बच्चे को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी गईं। भय, दबाव और असहनीय मानसिक तनाव के बीच वह कर्मचारी टूट गया, और उसकी चुप्पी हमेशा के लिए मौत में बदल गई।

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चुप क्यों हैं ‘लोकतंत्र की रक्षक’: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए भाजपा अध्यक्ष ने पूछा कि यदि वे स्वयं को लोकतंत्र की प्रहरी कहती हैं, तो फिर ऐसे मामलों पर उनकी चुप्पी क्या दर्शाती है? क्या अवैध घुसपैठियों और वोट बैंक की राजनीति इतनी अहम हो गई है कि देश के नागरिकों, चुनाव अधिकारियों और उनके परिवारों की जान की कोई कीमत नहीं रह गई? उन्होंने कहा कि आज बंगाल में रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के सिवा कोई भी सुरक्षित नहीं दिखता.....न आम नागरिक, न सरकारी कर्मचारी और न ही लोकतांत्रिक संस्थाएं।

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संवैधानिक ढांचे पर सीधा हमला: सरावगी ने आरोप लगाया कि एसआईआर जैसी संवैधानिक प्रक्रियाओं पर भी टीएमसी हिंसा का रास्ता अपनाती है। वोट बैंक बचाने के लिए चुनाव आयोग की प्रक्रिया, कानून का राज और संविधान..... सबको आग में झोंक दिया जा रहा है। यह केवल राजनीतिक अराजकता नहीं, बल्कि सुनियोजित संवैधानिक विध्वंस है। उन्होंने चेतावनी दी कि बंगाल की जनता अब इस डर और दमन को और सहने वाली नहीं है। भाजपा अशोक दास को न्याय दिलाने और बंगाल को भयमुक्त बनाने तक पीछे नहीं हटेगी।

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पंजाब में मीडिया पर वार, लोकतंत्र कराह रहा: बंगाल के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पंजाब का रुख किया, जहां उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर मीडिया को दबाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ.....पत्रकारिता आज सत्ता की आंखों की किरकिरी बन चुकी है। उन्होंने पंजाब में समाचार संस्थानों पर छापेमारी, पत्रकारों के साथ मारपीट और दफ्तरों को जबरन सील करने की घटनाओं को सत्ता का नंगा चेहरा बताया। पंजाब केसरी के पत्रकारों और कर्मचारियों के साथ पुलिसिया बर्बरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक अखबार पर हमला नहीं, बल्कि सच बोलने की हिम्मत पर हमला है। जालंधर स्थित सूरानुसी प्रिंटिंग प्रेस में पुलिस बल के साथ घुसकर कर्मचारियों से मारपीट को उन्होंने सत्ता की घबराहट का प्रमाण बताया.....जब सरकार सवालों से डरने लगे, तो वह कलम पर लाठी चलाती है।

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भाजपा की मांग और चेतावनी: बिहार भाजपा ने बीएलओ अशोक दास की मौत की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जब तक दोषी नेताओं और गुंडों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही चाकुलिया सहित हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में टीएमसी समर्थित अपराधियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। सरावगी ने स्पष्ट कहा कि चाहे बंगाल हो या पंजाब..... भाजपा लोकतंत्र, संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगी। यह लड़ाई सत्ता के खिलाफ नहीं, बल्कि डर के खिलाफ है.....और इस लड़ाई में पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।