दरभंगा: मां वाणेश्वरी मंदिर चोरी कांड में पुलिस की संदिग्ध निष्क्रियता, एक महीने बाद भी अनसुलझा रहस्य
मनीगाछी थाना क्षेत्र के मकरंदा भंडारिसम गांव में मां वाणेश्वरी भगवती मंदिर से 20 फरवरी 2025 की देर रात हुई 10 लाख रुपये की चोरी के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक महीने बाद भी न तो कोई आरोपी पकड़ा गया और न ही चोरी गए सोने-चांदी के मुकुट, ढाई क्विंटल पीतल की घंटी और हजारों रुपये के सिक्कों का कोई सुराग मिला। पुलिस की इस नाकामी और लापरवाही के खिलाफ मिथिला स्टूडेंट यूनियन के आदित्य मंडल और रमेश बाबा ने गुरुवार को अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया. पढ़े पुरी खबर......

दरभंगा: मनीगाछी थाना क्षेत्र के मकरंदा भंडारिसम गांव में मां वाणेश्वरी भगवती मंदिर से 20 फरवरी 2025 की देर रात हुई 10 लाख रुपये की चोरी के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक महीने बाद भी न तो कोई आरोपी पकड़ा गया और न ही चोरी गए सोने-चांदी के मुकुट, ढाई क्विंटल पीतल की घंटी और हजारों रुपये के सिक्कों का कोई सुराग मिला। पुलिस की इस नाकामी और लापरवाही के खिलाफ मिथिला स्टूडेंट यूनियन के आदित्य मंडल और रमेश बाबा ने गुरुवार को अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया।
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इस घटना ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और कार्यक्षमता पर कई सवाल उठा दिए हैं। आखिर एक महीने में पुलिस क्या कर रही थी? क्या फॉरेंसिक टीम की जांच सिर्फ दिखावा थी? क्या स्थानीय थाना स्तर पर कोई ठोस रणनीति बनाई भी गई, या फिर मामला ऊपरी अधिकारियों की फाइलों में दबकर रह गया? मंदिर जैसे संवेदनशील स्थान पर हुई चोरी के बाद भी पुलिस ने न तो आसपास के इलाकों में गहन छानबीन की और न ही संदिग्धों की पहचान के लिए कोई प्रभावी कदम उठाया। क्या यह पुलिस की अक्षमता है या फिर जानबूझकर की गई उदासीनता?
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स्थानीय लोगों का गुस्सा भी इसी ओर इशारा करता है। एक ग्रामीण ने सवाल उठाया, "जब चोर इतने बड़े पैमाने पर चोरी कर मंदिर को लूट सकते हैं, तो पुलिस उन्हें पकड़ने में इतनी असहाय क्यों है? क्या उनके पास संसाधनों की कमी है या इच्छाशक्ति की?" मंदिर के पुजारी ने भी पुलिस की सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए कहा, "घटना के बाद पुलिस ने दो-तीन बार दौरा किया, लेकिन उसके बाद कोई जवाब नहीं। क्या हमारी आस्था की कीमत इतनी सस्ती है?"
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पुलिस की कार्यशैली पर सवाल सिर्फ जांच की धीमी गति तक सीमित नहीं है। यह भी नहीं पता कि क्या पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय मुखबिरों या अन्य तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया। क्या चोरी के सामानों को बेचने वाले संभावित बाजारों पर नजर रखी गई? अगर हां, तो नतीजा क्यों नहीं निकला? और अगर नहीं, तो पुलिस की प्राथमिकता में यह मामला आता ही कहां है?
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मिथिला स्टूडेंट यूनियन के आदित्य मंडल ने पुलिस की निष्क्रियता को शर्मनाक बताते हुए कहा, "यह सिर्फ चोरी का मामला नहीं, बल्कि मिथिला की आस्था पर हमला है। पुलिस की लापरवाही से अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। क्या पुलिस को कोई जवाबदेही नहीं?" अनशनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक आरोपियों को पकड़ा नहीं जाता और चोरी का सामान बरामद नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
अनशन पर बैठे मिथिला स्टूडेंट यूनियन के आदित्य मंडल और रमेश बाबा।
दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से इस मामले पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। क्या यह चुप्पी उनकी विफलता को स्वीकार करना है या फिर जनता के सवालों से बचने की कोशिश? जिला प्रशासन और पुलिस की इस संदिग्ध खामोशी ने लोगों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया है।
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