हमारी रिपोर्ट पढ़ते ही हरकत में आई पुलिस व्यवस्था: डीजीपी का सीधा नंबर जारी, अब थानेदारों की मनमानी, सड़क पर वसूली और ‘पैसे बिना एफआईआर’ कहने वालों पर गिरेगी प्रशासनिक गाज जनता के हाथ में पहुँचा बिहार पुलिस का सबसे बड़ा अस्त्र....
बिहार की पुलिस व्यवस्था, जिसे लंबे समय तक जनता ने सुस्ती, संवेदनहीनता और कथित भ्रष्ट आचरण के पर्याय के रूप में देखा, अब उसी व्यवस्था के भीतर से एक ऐसा कठोर, निर्णायक और भय उत्पन्न करने वाला हस्तक्षेप सामने आया है, जिसने राज्य के हर थानाध्यक्ष, हर चौकी प्रभारी और हर वर्दीधारी कर्मी की कार्यशैली पर सीधा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने जनता और पुलिस के बीच खड़ी उस अदृश्य दीवार को तोड़ने का औपचारिक उद्घोष कर दिया है, जिसके कारण वर्षों से पीड़ित फरियादी थानों की सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते रहे, मगर न्याय उनके हाथ नहीं लगा. पढ़े पूरी रिपोर्ट......
दरभंगा/बिहार: बिहार की पुलिस व्यवस्था, जिसे लंबे समय तक जनता ने सुस्ती, संवेदनहीनता और कथित भ्रष्ट आचरण के पर्याय के रूप में देखा, अब उसी व्यवस्था के भीतर से एक ऐसा कठोर, निर्णायक और भय उत्पन्न करने वाला हस्तक्षेप सामने आया है, जिसने राज्य के हर थानाध्यक्ष, हर चौकी प्रभारी और हर वर्दीधारी कर्मी की कार्यशैली पर सीधा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने जनता और पुलिस के बीच खड़ी उस अदृश्य दीवार को तोड़ने का औपचारिक उद्घोष कर दिया है, जिसके कारण वर्षों से पीड़ित फरियादी थानों की सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते रहे, मगर न्याय उनके हाथ नहीं लगा।

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अब यदि किसी थाने में प्राथमिकी लिखने से इनकार किया जाए, सड़क पर वाहन रोककर अवैध वसूली की जाए, वर्दी की आड़ में धमकी, अपमान या आर्थिक शोषण किया जाए, थानाध्यक्ष “ऊपर से आदेश नहीं है” का राग अलापें, या आम नागरिक को उसकी समस्या के लिए दर-दर भटकाया जाए.... तो जनता को अब थाने की चौखट पर गिड़गिड़ाने की आवश्यकता नहीं है।डीजीपी नियंत्रण कक्ष का सीधा नंबर अब वर्दी जवाबदेह होगी।

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बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा डीजीपी नियंत्रण कक्ष के दो आधिकारिक मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर दिए गए हैं। 9031829339,9031829340 इन नंबरों पर कॉल करने पर कोई शुल्क नहीं, कोई माध्यम नहीं, कोई सिफारिश नहीं, कोई दलाल नहीं सीधे शिकायत दर्ज होगी, और कार्रवाई भी उतनी ही शीघ्र होगी। यह नंबर अब केवल संपर्क सूत्र नहीं, बल्कि उन पुलिसकर्मियों के लिए चेतावनी-पत्र है, जो आज भी यह समझते हैं कि वर्दी उन्हें जनता से ऊपर खड़ा कर देती है। अब ‘पैसे के बिना एफआईआर’ कहने वालों की खैर नहीं राज्य पुलिस नेतृत्व के स्पष्ट संकेत हैं कि जो थानेदार यह सोचते थे कि बिना लेन-देन के प्राथमिकी नहीं लिखी जाएगी, जो कर्मी चालान के नाम पर सौदेबाजी करते थे, जो चौकी पर फरियादी को घंटों बैठाकर अपमानित करते थे उन सबकी अब कुंडली सीधे पुलिस महानिदेशक के हाथ में होगी।

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अब यदि किसी थाना क्षेत्र से शिकायत जाती है, तो थानाध्यक्ष की जवाबदेही तय होगी, संबंधित पुलिसकर्मी की भूमिका की जांच होगी, और दोष सिद्ध होने पर प्रशासनिक उपचार नहीं, बल्कि दंडात्मक कार्रवाई होगी हर थानाध्यक्ष के लिए यह अंतिम चेतावनी समझी जाए यह व्यवस्था केवल सूचना तंत्र नहीं है, यह हर थाना प्रभारी के लिए अंतिम चेतावनी है कि... थाना अब निजी जागीर नहीं, वर्दी सत्ता का नहीं, सेवा का प्रतीक है।

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जनता को “अनपढ़ भीड़” समझने की मानसिकता अब दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगी: डीजीपी का नंबर अब जनता की जेब में है, और इसका अर्थ यह है कि अब हर गलत हरकत की सीधी रिपोर्ट शीर्ष स्तर तक पहुँचेगी।पारदर्शिता की यह पहल डर उन लोगों के लिए, राहत जनता के लिए इस पहल ने एक संदेश स्पष्ट कर दिया है अब पुलिस जनता से ऊपर नहीं, जनता के प्रति जवाबदेह है। जो ईमानदार हैं, उनके लिए यह व्यवस्था संरक्षण कवच है, और जो वर्षों से वर्दी की आड़ में भय, वसूली और सत्ता का प्रदर्शन करते रहे हैं उनके लिए यह व्यवस्था प्रशासनिक काल की शुरुआत है। अब फोन बजेगा, और कार्रवाई भी बजेगी यदि आपके साथ थानेदार दुर्व्यवहार करे, पुलिसकर्मी अवैध मांग करे, प्रशासनिक समस्या अनसुनी हो, या न्याय को जानबूझकर रोका जाए तो बस डीजीपी नियंत्रण कक्ष के इन नंबरों पर कॉल कीजिए।अब शिकायत काग़ज़ में नहीं दबेगी, और दोषी वर्दी में नहीं बचेगा।
