रिश्ते पद से नहीं, व्यवहार से बनते हैं… दरभंगा की यादें समेटकर पटना रवाना हुए सत्येंद्र प्रसाद; दो वर्ष चार माह का ऐसा सफर, जिसे प्रशासन, मीडिया और आमजन लंबे समय तक करेंगे याद… भावुक विदाई के बीच छलकी आंखें, नई जिम्मेदारी के साथ आशीष अमन ने संभाली जनसंपर्क विभाग की कमान
सरकारी दफ्तरों में स्थानांतरण एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन कुछ विदाइयां ऐसी होती हैं जो केवल आदेश की एक पंक्ति नहीं होतीं, बल्कि सैकड़ों यादों, अनगिनत रिश्तों और वर्षों की आत्मीयता को अपने साथ समेट ले जाती हैं। बुधवार का दिन जिला जनसंपर्क कार्यालय, दरभंगा के लिए कुछ ऐसा ही रहा। उप निदेशक जनसंपर्क सह प्रभारी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सत्येंद्र प्रसाद को जब उनके नए दायित्व के लिए भावभीनी विदाई दी गई, तो वहां मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और मीडिया प्रतिनिधियों के चेहरों पर सम्मान, अपनापन और भावनाओं का अनोखा संगम साफ दिखाई दे रहा था. पढ़े पूरी खबर.....
दरभंगा, 08 जुलाई 2026। सरकारी दफ्तरों में स्थानांतरण एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन कुछ विदाइयां ऐसी होती हैं जो केवल आदेश की एक पंक्ति नहीं होतीं, बल्कि सैकड़ों यादों, अनगिनत रिश्तों और वर्षों की आत्मीयता को अपने साथ समेट ले जाती हैं। बुधवार का दिन जिला जनसंपर्क कार्यालय, दरभंगा के लिए कुछ ऐसा ही रहा। उप निदेशक जनसंपर्क सह प्रभारी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सत्येंद्र प्रसाद को जब उनके नए दायित्व के लिए भावभीनी विदाई दी गई, तो वहां मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और मीडिया प्रतिनिधियों के चेहरों पर सम्मान, अपनापन और भावनाओं का अनोखा संगम साफ दिखाई दे रहा था।

सत्येंद्र प्रसाद का स्थानांतरण खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना में किया गया है। इसके साथ ही उन्हें सहकारिता विभाग तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। यह नई जिम्मेदारी निश्चित रूप से उनके प्रशासनिक अनुभव और कार्यकुशलता का प्रमाण है, लेकिन दरभंगा के लिए यह एक ऐसे अधिकारी की विदाई भी है, जिसने अपने व्यवहार, सादगी और कार्यशैली से अलग पहचान बनाई। अपने विदाई संबोधन में सत्येंद्र प्रसाद ने जब दरभंगा में बिताए गए दो वर्ष चार माह के कार्यकाल को याद किया, तो उनके शब्दों में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उस मिट्टी से जुड़ी आत्मीयता झलक रही थी। उन्होंने कहा कि दरभंगा की संस्कृति में जो मिठास है, वह शायद ही कहीं और देखने को मिले। यहां के लोगों का अपनापन, मीडिया का सहयोग, प्रशासनिक अधिकारियों का समन्वय और कार्यालय के कर्मचारियों की निष्ठा ने उनके पूरे कार्यकाल को सहज, सफल और यादगार बना दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि इस पूरे कार्यकाल में उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वे किसी कठिन परिस्थिति में अकेले हैं।

उन्होंने विशेष रूप से जिला जनसंपर्क कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक कर्मचारी ने अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, समयबद्धता और जिम्मेदारी के साथ किया। यही कारण रहा कि विभागीय कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ते रहे और सरकार की योजनाओं एवं प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी समय पर आम जनता तक पहुंचती रही। विदाई समारोह में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी सत्येंद्र प्रसाद के व्यक्तित्व और कार्यशैली की खुलकर प्रशंसा की। किसी ने उन्हें अनुशासनप्रिय अधिकारी बताया, तो किसी ने उन्हें ऐसा मार्गदर्शक कहा, जिसने हर सहयोगी को आगे बढ़ने का अवसर दिया। मनीष कुमार आनंद ने कहा कि उनके साथ कार्य करते हुए उन्होंने बहुत कुछ सीखा। वहीं राजेश कुमार ने कहा कि सत्येंद्र प्रसाद हमेशा सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। विकास कुमार ने भी कहा कि वे समयबद्ध कार्य निष्पादन पर विशेष बल देते थे और अपने मार्गदर्शन से पूरी टीम को बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते रहे।

मिथिला जन जन की आवाज परिवार के लिए भी यह अवसर भावुक करने वाला रहा। सत्येंद्र प्रसाद का इस समाचार परिवार से केवल सरकारी संवाद तक सीमित रिश्ता नहीं था, बल्कि वे समाचारों को गंभीरता से पढ़ते थे, सकारात्मक सुझाव देते थे और निष्पक्ष पत्रकारिता की सराहना भी करते थे। वे उन अधिकारियों में शामिल रहे जिन्होंने मीडिया को केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी माना। उनकी यह सहजता और संवादप्रियता उन्हें पत्रकारों के बीच भी सम्मान दिलाती रही। "मिथिला जन जन की आवाज" परिवार उनके स्नेह, विश्वास और आत्मीय सहयोग के लिए सदैव उनका आभारी रहेगा तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करता है। इसी अवसर पर सहायक निदेशक आशीष अमन ने प्रभारी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी का पदभार ग्रहण किया। उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे भी जनसंपर्क विभाग की गरिमा और कार्यसंस्कृति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करेंगे।

विदाई समारोह के अंत में माहौल भावुक हो उठा। मुस्कुराते चेहरों के पीछे बिछड़ने का एहसास साफ दिखाई दे रहा था। सभी ने पुष्पगुच्छ, शुभकामनाओं और तालियों के बीच सत्येंद्र प्रसाद को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। यह विदाई केवल एक अधिकारी की विदाई नहीं थी, बल्कि उन रिश्तों को सम्मान देने का अवसर था, जो पद और अधिकार से नहीं, बल्कि विनम्र व्यवहार, पारदर्शी कार्यशैली और मानवीय संवेदनाओं से बनते हैं। दरभंगा उन्हें एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ऐसे सरल, सहज और संवादप्रिय व्यक्तित्व के रूप में भी लंबे समय तक याद रखेगा, जिसने अपने कार्यकाल में जनसंपर्क को केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि लोगों से दिल जोड़ने का माध्यम बनाया।
