मनचलों की अब खैर नहीं! दरभंगा की सड़कों पर उतरीं चटख गुलाबी स्कूटियां, हर मोड़ पर ‘पुलिस दीदी’ की पैनी निगाह; छात्राओं पर फब्तियां कसने और पीछा करने वालों के लिए अभया ब्रिगेड बनी नई चुनौती।

रक्षाबंधन पर दरभंगा पुलिस का बड़ा सुरक्षा अभियान, 25 गुलाबी स्कूटी और 20 बाइक पर सवार अभया ब्रिगेड करेगी निगरानी; स्कूल-कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और छात्राओं की आवाजाही वाले इलाकों में रहेगी विशेष चौकसी.. पढ़े पूरी खबर....

मनचलों की अब खैर नहीं! दरभंगा की सड़कों पर उतरीं चटख गुलाबी स्कूटियां, हर मोड़ पर ‘पुलिस दीदी’ की पैनी निगाह; छात्राओं पर फब्तियां कसने और पीछा करने वालों के लिए अभया ब्रिगेड बनी नई चुनौती।
मनचलों की अब खैर नहीं! दरभंगा की सड़कों पर उतरीं चटख गुलाबी स्कूटियां, हर मोड़ पर ‘पुलिस दीदी’ की पैनी निगाह; छात्राओं पर फब्तियां कसने और पीछा करने वालों के लिए अभया ब्रिगेड बनी नई चुनौती।

दरभंगा। दरभंगा की सड़कों पर अब केवल यातायात की आवाजाही नहीं दिखेगी, बल्कि छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस की ऐसी विशेष निगरानी भी नजर आएगी, जो मनचलों और महिलाओं को परेशान करने वाले तत्वों के लिए साफ संदेश लेकर निकली है... सड़क, चौराहा, स्कूल, कॉलेज या कोचिंग संस्थान के आसपास किसी भी तरह की अभद्र हरकत अब पुलिस की नजर से छिपी नहीं रहेगी।

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रक्षाबंधन के अवसर पर दरभंगा पुलिस ने महिला सुरक्षा को लेकर ‘पुलिस दीदी’ यानी अभया ब्रिगेड को मैदान में उतार दिया है। शुक्रवार को वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने हरी झंडी दिखाकर इस विशेष अभियान को रवाना किया। अभियान की सबसे खास तस्वीर रही चटख गुलाबी रंग की स्कूटियों पर सवार महिला पुलिसकर्मियों की टोली, जिसने यह संकेत दिया कि छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस अब सड़क पर सीधे मौजूद रहेगी। 25 स्कूटियों और 20 बाइक को इस विशेष टीम में शामिल किया गया है। तस्वीरों में सामने खड़ी चटख गुलाबी स्कूटियां इस अभियान की अलग पहचान बनती दिखाई दे रही हैं। प्रत्येक स्कूटी पर दो महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जबकि प्रत्येक बाइक पर दो पुरुष पुलिसकर्मी रहेंगे। यानी जहां महिला पुलिसकर्मी छात्राओं से सीधे संवाद कर उनकी परेशानी समझेंगी, वहीं पुरुष पुलिसकर्मियों की टीम भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखेगी।

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गुलाबी स्कूटी देखते ही बदलनी पड़ सकती है मनचलों की राह: दरभंगा की सड़कों पर अब ये चटख गुलाबी स्कूटियां महज वाहन नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा अभियान की चलती-फिरती पहचान होंगी। जिस इलाके में छात्राओं की अधिक आवाजाही होगी, जिस रास्ते से स्कूल-कॉलेज की छात्राएं गुजरती हैं या जहां कोचिंग संस्थानों के आसपास युवतियों की भीड़ रहती है, वहां अभया ब्रिगेड की मौजूदगी दिखाई दे सकती है। मनचलों के लिए सबसे बड़ा संदेश यही है कि किसी छात्रा को देखकर फब्तियां कसना, उसका रास्ता रोकना, पीछा करना या किसी भी तरह से उसे परेशान करना अब हल्की हरकत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में पुलिस की नजर पड़ने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। यानी जिस सड़क, गली या चौराहे को कुछ लोग छात्राओं को परेशान करने का आसान स्थान समझते थे, वहां अब पुलिस की सक्रिय मौजूदगी उस सोच पर सीधा विराम लगाने वाली है।

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स्कूल-कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के आसपास विशेष निगरानी: अभया ब्रिगेड की गश्ती का विशेष फोकस स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान और छात्राओं की अधिक आवाजाही वाले क्षेत्र होंगे। इन स्थानों पर अक्सर छात्राओं के साथ छेड़छाड़, फब्तियां कसने या अनावश्यक रूप से पीछा करने जैसी शिकायतें सामने आती हैं। पुलिस का उद्देश्य ऐसे मामलों को शुरुआत में ही रोकना और छात्राओं के भीतर सुरक्षा का विश्वास मजबूत करना है। अब इन इलाकों में पुलिस दीदी की मौजूदगी छात्राओं के लिए भरोसे का संदेश होगी, जबकि गलत मंशा से वहां खड़े रहने वालों के लिए यह स्पष्ट चेतावनी होगी कि पुलिस की निगाह से बचकर हरकत करना आसान नहीं होगा।

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‘पुलिस दीदी’ से सीधे कह सकेंगी छात्राएं अपनी परेशानी: इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू केवल निगरानी नहीं, बल्कि संवाद और सहायता भी है। किसी छात्रा को रास्ते में परेशानी हो, कोई उसे परेशान कर रहा हो, किसी स्थान पर असुरक्षित महसूस हो या महिला सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या सामने आए तो वह पुलिस दीदी से अपनी बात साझा कर सकती है। वरीय पुलिस अधीक्षक ने पुलिसकर्मियों को बालिकाओं की सुरक्षा, जागरूकता एवं सहायता के लिए सक्रिय रूप से काम करने तथा आमजन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल के पीछे संदेश साफ है....पुलिस केवल घटना के बाद कार्रवाई करने वाली व्यवस्था नहीं, बल्कि घटना से पहले सुरक्षा का भरोसा देने वाली व्यवस्था भी बने। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभया ब्रिगेड की गश्त का असर केवल पुलिस की मौजूदगी तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस की नियमित निगरानी से उन तत्वों पर दबाव बनेगा जो छात्राओं की आवाजाही वाले स्थानों पर खड़े होकर उन्हें परेशान करने की कोशिश करते हैं। आज जो व्यक्ति यह समझकर सड़क किनारे खड़ा है कि उसकी हरकत किसी की नजर में नहीं आएगी, उसे यह समझना होगा कि चटख गुलाबी स्कूटी पर आती पुलिस दीदी की नजर उस पर पड़ सकती है। और यही इस अभियान का सबसे बड़ा संदेश है...छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की मानसिकता छोड़नी होगी।

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दरभंगा पुलिस ने महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए अभया ब्रिगेड को सक्रिय किया है। आने वाले दिनों में इन टीमों की सक्रियता शहर की सड़कों पर दिखाई दे सकती है। चटख गुलाबी स्कूटियों की यह कतार अब केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा के लिए दरभंगा पुलिस की नई पहचान बनती दिखाई दे रही है। छात्राओं के लिए जहां यह दृश्य भरोसा पैदा करेगा, वहीं मनचलों के लिए यह साफ चेतावनी है कि सार्वजनिक स्थान किसी को परेशान करने की खुली छूट नहीं हैं। अब सड़क पर आपकी हरकत से पहले आपकी सोच जरूरी है....क्योंकि ‘पुलिस दीदी’ की नजर कब किस मोड़ पर पड़ जाए, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं होगा।