दरभंगा नृत्य महोत्सव-2025: युवराज कपिलेश्वर सिंह की उपस्थिति में संस्कृति का भव्य उत्सव
जब कला और संस्कृति का संगम होता है, तो आत्मा स्वयं नृत्य करने लगती है। ऐसा ही नजारा शनिवार को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रांगण में देखने को मिला, जब सृष्टि फाउंडेशन के 19वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत दरभंगा नृत्य महोत्सव-2025 का भव्य आयोजन किया गया। इस महोत्सव ने भारतीय शास्त्रीय और लोक कलाओं की दिव्यता को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया और उन्हें आनंद से भर दिया. पढ़े पुरी खबर.......

दरभंगा: जब कला और संस्कृति का संगम होता है, तो आत्मा स्वयं नृत्य करने लगती है। ऐसा ही नजारा शनिवार को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रांगण में देखने को मिला, जब सृष्टि फाउंडेशन के 19वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत दरभंगा नृत्य महोत्सव-2025 का भव्य आयोजन किया गया। इस महोत्सव ने भारतीय शास्त्रीय और लोक कलाओं की दिव्यता को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया और उन्हें आनंद से भर दिया।
शाही आभा से आलोकित दरभंगा का मंच: जैसे ही युवराज कुमार कपिलेश्वर सिंह विश्वविद्यालय प्रांगण में पधारे, ऐसा प्रतीत हुआ मानो इतिहास स्वयं सजीव हो उठा। हवा में उल्लास की तरंगें उठीं, और प्रांगण की दीवारों ने जैसे स्वयं उद्घोष किया – "हमारे सरकार आज पधारे हैं!"। उनके आगमन के साथ ही वातावरण में एक नई ऊर्जा प्रवाहित हो उठी। उनके स्वागत में नृत्य और संगीत की मधुर लहरियां गूंज उठीं, और उनका सान्निध्य पाकर कला प्रेमियों का हृदय हर्ष से झूम उठा।
युवराज कुमार कपिलेश्वर सिंह ने इस अवसर पर सृष्टि फाउंडेशन के कला संवर्धन के प्रयासों की सराहना की और कहा, "नृत्य और संगीत केवल कला के रूप नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर के जीवंत प्रमाण हैं। ये हमें हमारी परंपराओं से जोड़ते हैं और समाज में समरसता का संचार करते हैं।" उनके विचारों ने समस्त कला प्रेमियों के मन में प्रेरणा का संचार किया।
इस अवसर पर कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डे ने कहा कि नृत्य और संगीत हमारे जीवन में गहरा प्रभाव डालते हैं। बेनीपुर विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने नृत्य को मानसिक तनाव को कम करने का अद्भुत साधन बताया।
शास्त्रीय और लोक नृत्यों की दिव्य प्रस्तुति: महोत्सव दो भव्य चरणों में संपन्न हुआ। पहले चरण में सुबह 11 बजे दरबार हॉल में नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। इसके बाद शाम 6 बजे मुक्ताकाश मंच पर कला की अविस्मरणीय प्रस्तुतियों का सिलसिला आरंभ हुआ। कलाकारों ने शास्त्रीय, लोक और समकालीन नृत्य शैलियों में अद्भुत प्रस्तुतियां दीं। संगीत और प्रकाश संयोजन ने हर प्रस्तुति को और भी मनमोहक बना दिया।
कला के सुर और ताल में बंधे दर्शक: इस महोत्सव में न केवल स्थानीय, बल्कि देशभर के प्रख्यात कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
गुरु संचिकांत प्रधान ने ओड़िशी नृत्य से मंत्रमुग्ध कर दिया।
गुरु रास बिहारी नाथ की गायकी ने वातावरण में भक्ति और प्रेम का संचार किया।
गुरु प्रदीप कुमार महाराणा की वायलिन की मधुर ध्वनियों ने संगीत प्रेमियों को आत्मविभोर कर दिया।
गुरु सौम्य रंजन जोशी की बांसुरी की मीठी तान और आलोक रंजन दास के पखावज वादन ने सभी को रससिक्त कर दिया।
कोलकाता की नृत्यांगना सोमा मंडल ने भरतनाट्यम की अनुपम प्रस्तुति से मंच को जीवंत कर दिया।
सृष्टि फाउंडेशन के उदीयमान सितारे: सृष्टि फाउंडेशन के युवा कलाकारों ने भी अपनी प्रतिभा से सबको चकित कर दिया। सुबोध दास, अंकिता झा, सत्यम कुमार झा, जयश्री जयंती, श्रेया झा, रितु रानी, पलक राज, श्रुति सिंह, संवेदना कुमारी, आराध्या झा, सिद्धि सुमन, नेहा गुप्ता, अमाया प्रसाद, आर्या कुमारी** सहित कई उभरते कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से मंच को गौरवान्वित किया।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन: कार्यक्रम के अंत में सृष्टि फाउंडेशन के सचिव डॉ. एम के पाठक ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और दर्शकों का हार्दिक धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, "इस प्रकार के आयोजन केवल मनोरंजन के लिए नहीं होते, बल्कि ये हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं।"
संस्कृति के स्वर्णिम भविष्य की ओर एक कदम: दरभंगा नृत्य महोत्सव-2025 ने यह प्रमाणित कर दिया कि कला और संस्कृति की यह भूमि आज भी अपनी परंपराओं को संजोए हुए है। यह महोत्सव न केवल एक भव्य आयोजन था, बल्कि इसने कला और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक नई रोशनी जलाई। दरभंगा की धरती पर यह महोत्सव हर वर्ष इसी भव्यता से आयोजित होता रहे, यही सभी कला प्रेमियों की अभिलाषा है।