दरभंगा में ‘शोले’ वाला मौत का टावर कांड! जानिए कौन है वह युवक जिसने इंसाफ की चीख लेकर मोबाइल टावर को बना दिया रणभूमि… छह घंटे तक ऊपर मंडराती रही मौत, नीचे कांपती रही पुलिस और गांव… जेल भेजो वरना मेरी लाश उतरेगी! की दहाड़ से थर्राया बहेड़ी, गुरु की एक आवाज ने बचा ली जिंदगी। पढ़िए कैसे जमीनी विवाद ने अमरजीत यादव को पहुंचा दिया आत्मघाती विद्रोह की उस भयावह ऊंचाई पर, जहां पूरा दरभंगा सहम गया…
दरभंगा के बहेड़ी में गुरुवार का दिन अचानक किसी फिल्मी पटकथा की तरह भयावह, सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला बन गया। गांव के लोगों ने जो दृश्य देखा, उसने बरसों पुरानी फिल्म “शोले” के उस चर्चित दृश्य की याद ताजा कर दी, जब पानी की टंकी पर चढ़कर वीरू पूरे गांव को हिला देता है। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां कोई प्रेम कहानी नहीं थी… यहां एक युवक की चीख थी, जो खुद को “झूठे केस का शिकार” बता रहा था और न्याय की मांग करते-करते मौत के मोबाइल टावर पर जा चढ़ा. पढ़े पूरी रिपोर्ट.....
दरभंगा के बहेड़ी में गुरुवार का दिन अचानक किसी फिल्मी पटकथा की तरह भयावह, सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला बन गया। गांव के लोगों ने जो दृश्य देखा, उसने बरसों पुरानी फिल्म “शोले” के उस चर्चित दृश्य की याद ताजा कर दी, जब पानी की टंकी पर चढ़कर वीरू पूरे गांव को हिला देता है। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां कोई प्रेम कहानी नहीं थी… यहां एक युवक की चीख थी, जो खुद को “झूठे केस का शिकार” बता रहा था और न्याय की मांग करते-करते मौत के मोबाइल टावर पर जा चढ़ा।

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बहेड़ी थाना क्षेत्र के हाबीडीह गांव में उस वक्त अफरा-तफरी, भय और सनसनी का विस्फोट हो गया, जब 28 वर्षीय अमरजीत यादव अचानक गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गया। देखते ही देखते गांव की गलियां चीखों, कानाफूसियों और दहशत से भर गईं। किसी ने कहा.... आज कुछ बड़ा होने वाला है… तो कोई मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगा। बच्चे रोने लगे, महिलाएं माथा पकड़कर बैठ गईं और पुरुषों की भीड़ टावर के नीचे जमा हो गई। बताया जाता है कि अमरजीत यादव, राजा राम यादव का पुत्र है और वह लंबे समय से जमीनी विवाद को लेकर मानसिक तनाव में था। युवक का आरोप था कि गांव के कुछ लोगों ने उसे झूठे मामले में फंसाया है। इसी गुस्से, बेबसी और टूटते भरोसे के बीच उसने ऐसा कदम उठा लिया, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया।

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जेल भेजो… नहीं तो मेरी लाश उतरेगी: टावर के ऊपर खड़ा अमरजीत बार-बार नीचे झांकते हुए चीख रहा था.... जिसने मुझे फंसाया है, उसे जेल भेजो… नहीं तो मैं कूद जाऊंगा… मेरी लाश ही नीचे उतरेगी! उसकी आवाज में गुस्सा भी था, दर्द भी और एक खतरनाक हद तक पहुंच चुकी निराशा भी। नीचे मौजूद लोग सांस रोककर उसकी हर हरकत देख रहे थे। मोबाइल टावर की ऊंचाई पर खड़ा युवक कभी लोहे की रॉड पकड़ता, कभी नीचे झांकता और कभी आत्महत्या की धमकी देता। हर सेकंड ऐसा लग रहा था मानो मौत ऊपर मंडरा रही हो और नीचे पूरा गांव असहाय खड़ा हो। कुछ ही देर में यह खबर आग की तरह फैल गई। सैकड़ों लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। पूरा इलाका पुलिस सायरन, भीड़ की फुसफुसाहट और डर के सन्नाटे से भर गया। कोई कह रहा था..... उसे नीचे उतारो… तो कोई आरोपियों को कोस रहा था। कई बुजुर्गों ने कहा कि गांव में जमीन विवाद अब खून और मौत की तरफ बढ़ रहा है। घंटों तक लोग आसमान की तरफ गर्दन उठाए खड़े रहे। धूप सिर पर थी, लेकिन किसी को उसकी परवाह नहीं थी। सभी की निगाहें सिर्फ उस युवक पर थीं, जो इंसाफ की गुहार लगाते-लगाते मौत के मुहाने पर जा पहुंचा था।

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पुलिस भी हुई बेबस, छह घंटे तक चलता रहा.... हाई वोल्टेज ड्रामा: घटना की सूचना मिलते ही बहेड़ी थाना अध्यक्ष सूरज कुमार गुप्ता मौके पर पहुंचे। उनके साथ अंचलाधिकारी धन श्री वाला भी पहुंचे। पुलिस ने पहले समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि शिकायत ली जाएगी, निष्पक्ष जांच होगी और कार्रवाई भी होगी। लेकिन अमरजीत अपनी जिद पर अड़ा रहा। नीचे से पुलिसकर्मी चिल्लाते रहे..... नीचे उतर जाओ… बात होगी… लेकिन ऊपर से जवाब आता..... पहले जेल भेजो… तभी उतरूंगा! समय बीतता गया। दोपहर शाम में बदलने लगी, लेकिन युवक नीचे उतरने को तैयार नहीं था। हर गुजरते मिनट के साथ पुलिस की चिंता बढ़ती जा रही थी। क्योंकि अगर युवक एक कदम भी गलत रख देता, तो पूरा मामला भयावह हादसे में बदल सकता था।

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जब गुरु की आवाज बनी ‘मौत से वापसी’ का मंत्र: करीब छह घंटे बीत जाने के बाद प्रशासन ने एक अलग रास्ता अपनाया। अमरजीत के गुरु, गांव के जटा शंकर झा उर्फ “दुखी” को बुलाया गया। गांव में उनका विशेष सम्मान बताया जाता है। उन्हें माइक दिया गया। फिर जो हुआ, उसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। माइक से आवाज गूंजी.... अमरजीत… हम तुम्हारे गुरु बोल रहे हैं… नीचे उतर आओ… तुम्हारे साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा… यह आवाज सुनते ही टावर पर खड़ा युवक कुछ पल के लिए शांत हो गया। नीचे भीड़ में भी सन्नाटा छा गया। गुरु बार-बार उसे भरोसा दिलाते रहे कि समस्या का समाधान होगा, न्याय मिलेगा और कोई उसे अकेला नहीं छोड़ेगा। कहा जा रहा है कि गुरु की आवाज सुनकर अमरजीत भावुक हो गया। धीरे-धीरे उसने नीचे उतरना शुरू किया। जैसे-जैसे वह नीचे आ रहा था, वैसे-वैसे नीचे खड़े लोगों की धड़कनें सामान्य हो रही थीं।

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नीचे उतरते ही प्रशासन ने ली राहत की सांस: अमरजीत के सुरक्षित नीचे उतरते ही पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली। कई घंटे से टल रहा संभावित हादसा आखिरकार टल गया। थानाध्यक्ष और अंचलाधिकारी ने युवक से लिखित शिकायत ली और कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक युवक को अपनी बात सुनाने के लिए मौत के टावर पर क्यों चढ़ना पड़ा? क्या गांवों में जमीनी विवाद अब इतनी खतरनाक शक्ल ले चुके हैं कि लोग आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं? दरभंगा समेत बिहार के कई जिलों में जमीन विवाद लगातार हिंसक रूप ले रहे हैं। कहीं गोली चल रही है, कहीं हत्या हो रही है, तो कहीं लोग मानसिक प्रताड़ना से टूटकर आत्मघाती रास्ता चुन रहे हैं। बहेड़ी की यह घटना सिर्फ एक “ड्रामा” नहीं, बल्कि उस टूटते सामाजिक भरोसे की भयावह तस्वीर है, जहां लोग कानून से पहले टावर पर चढ़कर न्याय मांगने लगे हैं।

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‘शोले’ का दृश्य… लेकिन यह असली दर्द था: फिल्म शोले में वीरू का पानी टंकी पर चढ़ना दर्शकों के लिए मनोरंजन था। लोग हंसते थे, तालियां बजाते थे। लेकिन बहेड़ी का यह “टावर कांड” मनोरंजन नहीं था। यहां एक युवक सचमुच अपनी जान देने की धमकी दे रहा था। यहां भीड़ फिल्म नहीं देख रही थी… बल्कि एक संभावित मौत को अपनी आंखों के सामने मंडराते देख रही थी। यह दृश्य बताता है कि गांवों की मिट्टी में अब सिर्फ खेती का संघर्ष नहीं, बल्कि मानसिक तनाव, सामाजिक अविश्वास और प्रशासनिक डर भी गहराई तक उतर चुका है। घटना फिलहाल शांत हो चुकी है, लेकिन गांव में चर्चा अब भी जारी है। लोग पूछ रहे हैं..... क्या वाकई कार्रवाई होगी?क्या युवक को न्याय मिलेगा? या फिर यह मामला भी कुछ दिनों बाद फाइलों में दफन हो जाएगा..... बहेड़ी का यह “मोबाइल टावर कांड” अब सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं रह गया है। यह उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, जहां इंसाफ मांगने के लिए लोग जमीन छोड़कर मौत की ऊंचाइयों पर चढ़ने लगे हैं।
