"हैवानियत की हद: चौकीदार का बेटा बना दरिंदा, मिथिला की बेटी की चीखें दफन!"

मिथिला की धरती पर एक ऐसी खौफनाक घटना ने दस्तक दी है, जो हर मां-बाप के दिल में डर का साया छोड़ गई। 15 मार्च की वो काली रात, जब बहेड़ा थाना इलाके में एक 16 साल की मासूम लड़की की जिंदगी को दस दरिंदों ने अपने हवस के पंजों से कुचल डाला। सबसे डरावना सच? इनमें से एक हैवान, दुर्गेश पासवान, बिहार पुलिस के चौकीदार का बेटा है। जिसके बाप का काम कानून की हिफाजत करना है, उसका बेटा कानून को ठेंगा दिखाते हुए एक मासूम की अस्मत लूट रहा था। क्या उसे पुलिस का जरा भी खौफ नहीं था????... पढ़े पुरी खबर.......

"हैवानियत की हद: चौकीदार का बेटा बना दरिंदा, मिथिला की बेटी की चीखें दफन!"
"हैवानियत की हद: चौकीदार का बेटा बना दरिंदा, मिथिला की बेटी की चीखें दफन!": फोटो: मिथिला जन जन की आवाज

दरभंगा: मिथिला की धरती पर एक ऐसी खौफनाक घटना ने दस्तक दी है, जो हर मां-बाप के दिल में डर का साया छोड़ गई। 15 मार्च की वो काली रात, जब बहेड़ा थाना इलाके में एक 16 साल की मासूम लड़की की जिंदगी को दस दरिंदों ने अपने हवस के पंजों से कुचल डाला। सबसे डरावना सच? इनमें से एक हैवान, दुर्गेश पासवान, बिहार पुलिस के चौकीदार का बेटा है। जिसके बाप का काम कानून की हिफाजत करना है, उसका बेटा कानून को ठेंगा दिखाते हुए एक मासूम की अस्मत लूट रहा था। क्या उसे पुलिस का जरा भी खौफ नहीं था?

रात का सन्नाटा और हवस का शिकार: शाम ढलते ही वो मासूम अपने घर से शौच के लिए निकली थी। मगर उसे क्या पता था कि उसकी मासूमियत को रौंदने के लिए धोबीयाही गाछी की अंधेरी गलियों में मौत का जाल बिछा है। दुर्गेश पासवान, चौकीदार का बेटा, उसे बहलाकर उस अंधेरे में ले गया। वहां पहले से नौ और शैतान—सुमित, दिलखुश, सचित, अमित, अंकुश, सुजीत, विशाल, राघव और अंकित—नशे की आग में जलते हुए उसका इंतजार कर रहे थे। रात 9 बजे शुरू हुआ वो खौफनाक खेल, जहां उसकी चीखें सन्नाटे में दब गईं। दस दरिंदों ने बारी-बारी से उसकी अस्मत को तार-तार किया, खून से उसकी देह को लथपथ कर दिया। वो चीखती रही, रोती रही, पर उन हैवानों ने उसकी बेबसी का वीडियो बनाया और उसे बेहोश छोड़कर भाग गए।

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बिना कपड़ों, खून में लथपथ मिली मासूम: रात ढाई बजे, जब उसकी सांसें किसी तरह लौटीं, उसने मां की गोद में सिर रखकर कहा, "मां, उन्होंने वीडियो बनाया है। वीडियो कॉल करके धमकी देते हैं—जब बुलाएंगे, आना, नहीं तो सबको दिखा देंगे।" उसकी टूटी आवाज में सिर्फ दर्द नहीं, एक अनंत खौफ था। गांव वालों ने उसे बिना कपड़ों के, खून से सनी हालत में पाया। डरी-सहमी वो बच्ची अपनी सांसों को थामे थी। कुछ लोगों ने उसे कपड़े दिए, घर पहुंचाया, पर उसकी आंखों में वो खौफ अभी भी जिंदा है। खून के धब्बे उस मिट्टी पर छूट गए, जो अब उस रात की गवाही दे रही है।

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चौकीदार का बेटा, फिर भी बेखौफ! सबसे हैरान करने वाली बात—मुख्य आरोपी दुर्गेश पासवान का बाप बिहार पुलिस में चौकीदार है। जिसके घर में कानून की रोशनी होनी चाहिए थी, वहां से एक ऐसा हैवान निकला, जिसे न पुलिस का डर था, न कानून का खौफ। क्या उसे अपने बाप की वर्दी पर भरोसा था कि वो उसे बचा लेगा? या फिर उसे यकीन था कि मिथिला की ये गरीब बस्तियां उसकी हैवानियत को चुपचाप सह लेंगी? दस दरिंदों ने मिलकर उस मासूम को लूटा, और वीडियो कॉल पर धमकियां देकर उसे जिंदा लाश बना दिया। "बोलोगी तो हरिजन एक्ट में फंसा देंगे, जान से मार देंगे"—ये धमकियां उस परिवार के सीने पर हथौड़े की तरह बरसीं।

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दस दिन की खामोशी, फिर जागी पुलिस: दस दिन तक वो मां अपनी बेटी की सिसकियां सुनती रही। लोकलाज का डर, वीडियो वायरल होने का खौफ, और आरोपियों की धमकियां—सबने मिलकर उस परिवार को चुप कर दिया। 25 मार्च को, जब गांव में बात फैली और कुछ लोगों ने हिम्मत दी, तब जाकर FIR दर्ज हुई। थानाध्यक्ष चंद्रकांत गौरी ने कहा, "मेडिकल हो गया, छापेमारी जारी है।" ग्रामीण SP आलोक बोले, "सबूत जुटाए जा रहे हैं।" घटनास्थल से खून के निशान मिले, पर वो दरिंदे अभी तक आजाद घूम रहे हैं। क्या चौकीदार के बेटे को पुलिस की नरमी का भरोसा है? या फिर कानून की ये सुस्ती ही इन हैवानों को बेखौफ बनाती है?

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मिथिला की बेटियों, सावधान! ये खबर हर मिथिला की बेटी के लिए एक खौफनाक चेतावनी है। चौकीदार का बेटा भी अगर हैवान बन सकता है, तो फिर किस पर भरोसा करोगी? रात का अंधेरा अब कातिलों का ठिकाना बन चुका है। वो मासूम अब जिंदा लाश है—उसके सपने, उसकी हंसी, सबकुछ छीन लिया गया। क्या तुम भी अपनी जिंदगी को इन भेड़ियों की हवस का शिकार बनाना चाहती हो? अकेले मत निकलो, हर कदम पर खतरा है। ये दरिंदे तुम्हारी चीखों को वीडियो में कैद कर हंसते हैं। उस मासूम की टूटी सांसें चीख-चीखकर कह रही हैं—सावधान रहो, वरना अगली बारी तुम्हारी होगी।

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कानून का मजाक? चौकीदार का बेटा होने के बावजूद दुर्गेश की हिम्मत ने साबित कर दिया कि कानून का डर अब इन हैवानों के दिलों से गायब हो चुका है। मिथिला की जनता पूछ रही है—क्या पुलिस की वर्दी अब अपराधियों को ढाल दे रही है? उस बेटी की चीखें अभी भी गूंज रही हैं, पर क्या कोई सुन रहा है? पुलिस छापे मार रही है, पर वो शैतान अभी तक पकड़ से बाहर हैं। मिथिला की बेटियों, अपनी हिफाजत खुद करो, क्योंकि कानून का चौकीदार भी अब अपने घर को नहीं बचा पा रहा।