"लेडी सिंघम का विदाई संदेश: काम्या मिश्रा के इस्तीफे से बिहार पुलिस में हलचल"
बिहार के पुलिस महकमे में हाल के दिनों में एक के बाद एक चर्चित अधिकारियों के इस्तीफे ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचाई है, बल्कि जनमानस के बीच भी कौतूहल का विषय बन गया है। इसी कड़ी में 2019 बैच की तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा का नाम सुर्खियों में है, जिनका इस्तीफा हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया गया. पढ़े पुरी खबर......

पटना: बिहार के पुलिस महकमे में हाल के दिनों में एक के बाद एक चर्चित अधिकारियों के इस्तीफे ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचाई है, बल्कि जनमानस के बीच भी कौतूहल का विषय बन गया है। इसी कड़ी में 2019 बैच की तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा का नाम सुर्खियों में है, जिनका इस्तीफा हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया गया। दरभंगा ग्रामीण की पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत रही काम्या ने अपने कर्तव्यनिष्ठा और अपराधियों के प्रति कठोर रवैये से "लेडी सिंघम" की उपाधि अर्जित की थी। उनके इस अप्रत्याशित निर्णय ने बिहार के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
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काम्या मिश्रा ने अगस्त 2024 में निजी और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा पुलिस मुख्यालय को सौंपा था। कई माह तक यह प्रकरण अधर में लटका रहा, किंतु आखिरकार केंद्र सरकार ने इसे स्वीकृति प्रदान कर दी। यह खबर सबसे पहले "मिथिला जन-जन की आवाज़" नामक मंच पर प्रकाशित हुई, जिसने इसे त्वरित गति से अपडेट करते हुए जनता तक पहुंचाया। इस संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि काम्या दूसरी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में अपनी सेवाएं त्यागीं। इससे पूर्व पूर्णिया रेंज के पुलिस महानिरीक्षक शिवदीप लांडे ने भी निजी कारणों से इस्तीफा दिया था, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया था।
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काम्या मिश्रा का सफर अपने आप में एक प्रेरक कथा है। मात्र 22 वर्ष की आयु में यूपीएससी परीक्षा में 172वां स्थान प्राप्त कर उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया था। ओडिशा की निवासी काम्या ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा में भी उत्कृष्टता का परिचय दिया था, जब उन्होंने 12वीं कक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर क्षेत्रीय टॉपर का गौरव हासिल किया। दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी प्रारंभ की और प्रथम प्रयास में सफलता अर्जित की। बिहार कैडर में आने के पश्चात उन्होंने कई जटिल मामलों को सुलझाकर अपनी कुशलता का लोहा मनवाया। विशेष रूप से विकासशील इंसान पार्टी के नेता मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी की हत्या के मामले में उनकी त्वरित जांच और सफलता ने उन्हें व्यापक ख्याति दिलाई।
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किंतु इस शानदार करियर के बीच अचानक इस्तीफे का निर्णय कई प्रश्न छोड़ गया। उनके पति अवधेश दीक्षित, जो स्वयं 2019 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी के पद पर तैनात हैं, के साथ उनके वैवाहिक जीवन को भी इस संदर्भ में चर्चा का विषय बनाया जा रहा है। कुछ सूत्रों का मानना है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों और अपने पिता के व्यवसाय को संभालने की इच्छा ने उन्हें यह कठिन कदम उठाने को प्रेरित किया। वहीं, अन्य कयासों में उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की बात भी उठ रही है, हालांकि काम्या ने इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।
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इस्तीफे के पश्चात काम्या ने एक साक्षात्कार में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, "यह निर्णय मेरे लिए अत्यंत कठिन था, किंतु जीवन के कुछ क्षण ऐसे आते हैं जब हमें अपने कर्तव्यों से परे परिवार और समाज के प्रति दायित्वों को प्राथमिकता देनी पड़ती है। मैं अब ओडिशा में अपने पिता के व्यवसाय को संभालने के साथ-साथ वंचित बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के अपने सपने को साकार करने की दिशा में कार्य करूंगी।" इन शब्दों में उनकी संवेदनशीलता और समाज के प्रति समर्पण की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।
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काम्या के इस कदम ने जहां एक ओर बिहार पुलिस में रिक्तता का संकेत दिया, वहीं उनके भावी संकल्प ने लोगों के मन में आशा का संचार भी किया। उनके प्रशंसक और सहकर्मी इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि जिस अधिकारी ने अपराधियों के मन में भय पैदा किया, वह अब बच्चों के भविष्य को संवारने की राह पर चल पड़ी हैं। यह परिवर्तन निस्संदेह उनके व्यक्तित्व की बहुआयामी छवि को उजागर करता है।
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बिहार में हाल के दिनों में आईपीएस अधिकारियों के इस्तीफे ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। शिवदीप लांडे और काम्या मिश्रा जैसे अधिकारियों का प्रस्थान क्या केवल व्यक्तिगत कारणों का परिणाम है, अथवा इसके पीछे कोई गहरी वजह छिपी है, यह विचारणीय है। जनता अब यह जानने को उत्सुक है कि क्या काम्या मिश्रा का अगला पड़ाव राजनीति होगा, या वे वास्तव में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करेंगी। समय ही इस रहस्य से पर्दा उठाएगा, किंतु तब तक उनकी यह कथा प्रेरणा और चिंतन का विषय बनी रहेगी।